भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ७३ ) इस मेरे तत्त्व जाननेके निमित्त वर्णाश्रमी पुरुषोंमें पूर्वज- न्मके कर्मानुसार कोई सहस्रोंमें एक यत्न करता है ॥ ७ ॥ साक्षात्करोति मां कश्चिद्यत्नवत्स्वपि तेषु च ॥ मत्तोऽन्यन्नेक्षते किंचिन्मयि सर्वं च वीक्षते ॥८॥ उन सहस्रों यत्नवानोंमें कोई एक मुझको साक्षात् करता है मुझसे अन्य और किसीको नहीं देखता, और मुझमें सम्पूर्ण जगत्को देखता है ॥ ८ ॥ क्षितौ सुगन्धरूपेण तेजोरूपेण चाग्निषु ॥ प्रभारूपेण पूष्ण्यब्जे रसरूपेण चाप्सु च ॥९॥ पृथिवीमें सुगन्धरूपसे, अग्निमें तेजोरूपसे, सूर्यमें और चन्द्रमें प्रभारूपसे, जलमें रसरूपसे मैं स्थित हूं ॥ ९ ॥ धीतपोबलिनां चाहं धीस्तपो बलमेव च ॥ त्रिविधेषु विकारेषु मदुत्पन्नेष्वहं स्थितः ॥१०॥ बुद्धिमान् तपस्वी बलिष्ठोंमें मैं बुद्धि, तप और बलरूपसे स्थित हूं, तीनप्रकारके विकार मुझसेही उत्पन्न हुए हैं और उन सबमें मैं स्थित हूं ॥ १० ॥ न मां विन्दति पापीयान्मायामोहितचेतनः ॥ त्रिविकारा मोहयति प्रकृतिर्मे जगत्त्रयम् ११॥