भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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( ८० ) गणेशगीता-अ० ७. जो यत्न करके मेरी पूजा करता है, वह इष्ट फलको प्राप्त होता है, तीनों प्रकारकी पूजामें मानसी पूजा श्रेष्ठ है ॥१०॥ साप्युत्तमा मता पूजानिच्छया या कृता मम ॥ ब्रह्मचारी गृहस्थो वा वानप्रस्थो यतिश्च यः ११ वहभी यदि कामनारहित होकर कीजाय तौ अति उत्तम है, ब्रह्मचारी, गृहस्थ अथवा वानप्रस्थ या संन्यासी ॥ ११ ॥ एकां पूजां प्रकुर्वाणोऽप्यन्यो वा सिद्धिमृच्छति॥ मदन्यदेवं यो भक्त्या द्विषन्मामन्यदेवताम् १२ अथवा और जो कोई एक मेरी पूजाको करता है, वह सिद्धिको प्राप्त होता है, और मुझे छोडकर और मुझसे द्वेषकर जो और देवताका भक्तिसे पूजन करता है ॥ १२ ॥ सोऽपि मामेव यजते परं त्वविधितो नृप ॥ यो ह्यन्यदेवतां मां च द्विषन्नन्यां समर्च्चयेत् १३ हे राजन् ! अथवा मेरी पूजा विधिसे न करके और देव- ताका वा मेरा द्वेष पूजन करके करता है ॥ १३ ॥ याति कल्पसहस्रं स निरयान्दुःखभाक् सदा ॥ भूतशुद्धिं विधायादौ प्राणानां स्थापनं ततः १४

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