गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत। ( ८१ ) वह सहस्र कल्पवर्ष तक नरकमें पडकर सदा दुःख भोगता है, प्रथम भूतशुद्धि करके फिर प्राणायाम करे ॥ १४ ॥ आकृष्य चेतसो वृत्तिं ततो न्यासमुपक्रमेत् ॥ कृत्वान्तर्मातृकान्यासं बहिश्चाथ षडङ्गम् १५ फिर चित्तकी वृत्तियोंको आकर्षण करके न्यास करे, फिर मातृका न्यासकरे, फिर बहिरङ्ग षडङ्ग न्यास करे ॥ १५ ॥ न्यासं च मूलमंत्रस्य ततो ध्यात्वा जपेन्मनुम् ॥ स्थिरचित्तो जपेन्मन्त्रं यथा गुरुमुखागतम् १६॥ इसके उपरान्त मूलमंत्रका न्यास करके ध्यान करे और स्थिरचित्तसे गुरुमुखसे सुने मंत्रका जप करे ॥ १६ ॥ जपं निवेद्य देवाय स्तुत्वा स्तोत्रैरनेकधा ॥ एवं मां य उपासीत स लभेन्मोक्षमव्ययम्॥१७॥ फिर देवताके निमित्त जपको निवेदन कर अनेक प्रकारसे स्तोत्रका पाठ करे इस प्रकारसे जो मेरी उपासना करता है वह सनातनी मुक्तिको प्राप्त होता है ॥ १७ ॥ य उपासनया हीनो धिङ्नरो व्यर्थजन्मभाक् ॥ यज्ञोऽहमौषधं मन्त्रोऽग्निराज्यं च हविर्हुतम् १८॥