भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 130 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 83

( ८२ ) गणेशगीता-अ० ७. जो मनुष्य उपासनासे हीन है उसे धिक्कार है और उसका जन्म वृथा है, यज्ञ, औषध, मंत्र, अग्नि, आज्य, हवि, हुत यह सब मेरा ही स्वरूप है ॥ १८ ॥ ध्यानं ध्येयं स्तुतिं स्तोत्रं नतिर्भक्तिरुपासना ॥ त्रयीज्ञेयं पवित्रं च पितामहपितामहः ॥ १९ ॥ ध्यान, ध्येय, स्तुति, स्तोत्र, नमस्कार, भक्ति, उपासना, वेदत्रयीसे जानने योग्य, पवित्र, पितामहके पितामह यह सब मैं हीहूं ॥ १९ ॥ ॐकार पावनः साक्षी प्रभुर्मित्रं गतिर्लयः ॥ उत्पत्तिः पोषको बीजं शरणं वा स एव च॥२०॥ ॐकार, पावन, साक्षी, प्रभु, मित्र, गति, लय, उत्पत्ति, पोषक, बीज, शरण ॥ २० ॥ असन्मृत्युः सदमृतमात्मा ब्रह्माहमेव च ॥ दानं होमस्तपो भक्तिर्जपः स्वाध्याय एव च२१॥ इसी प्रकार असत्, सत्, अमृत, आत्मा तथा ब्रह्म यह सब मैं ही हूं, दान, होम, तप, भक्ति, जप, वेदपाठ ॥२१॥ यद्यत्करोति तत्सर्वं समे मयि निवेदयेत् ॥ योषितोऽथ दुराचाराः पापास्त्रैवर्णिकास्तथा२२