भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 85, कुल 130 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 85

( ८४ ) गणेशगीता-अ० ८. जो जो इस लोकमें तेजयुक्त और श्रेष्ठतम हैं वह सब मेरी विभूति हैं ॥ २५ ॥ ॐ तत्सदिति श्रीमद्गणेश० योगामृतार्थशास्त्रे गजाननवरेण्य- संवादे पंडितज्वालाप्रसादमिश्रकृतभाषाटीकायाम् उपासनायोगो नाम सप्तमोऽध्यायः ॥ ७ ॥ वरेण्य उवाच । भगवन्नारदो मह्यं तव नाना विभूतयः ॥ उक्तवांस्ता अहं वेद न सर्वाः सोऽपि वेत्ति ताः १ वरेण्य बोले हे गणेशजी ! नारदजीके मुखसे मैंने तुम्हारी अनेक विभूति श्रवण की हैं उन्हें मैं जानताहूं, सब नहीं जानता, कारण कि सम्पूर्ण विभूति तो नारदजी भी नहीं जानते ॥ १॥ त्वमेव तत्त्वतः सर्वा वेत्सि ता द्विरदानन ॥ निजं रूपमिदानीं मे व्यापकं चारु दर्शय ॥ २ ॥ हे गजानन ! आपही उन सबको तत्त्वसे जानते हो, इस समय मनोहर और व्यापक आप अपना रूप मुझे दिखाइये ॥ २ ॥ श्रीगजानन उवाच । एकस्मिन्मयि पश्य त्वं विश्वमेतच्चराचरम् ॥ नानाश्चर्याणि दिव्यानि पुरा दृष्टानि केनचित् ३