भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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( ९० ) गणेशगीता-अ० ८. पहले देखाहुआ आप अपना सौम्यरूप मुझे दिखाइये, हे भगवन् ! अपनी इच्छासे क्रीडाकरनेवाले आपकी लीलाको कौन जान सक्ता है ॥ २१ ॥ अनुग्रहान्मयादृष्टमैश्वरं रूपमीदृशम् ॥ ज्ञानचक्षुर्यतो दत्तं प्रसन्नेन त्वया मम ॥ २२ ॥ आपकी कृपासे मैंने यह इस प्रकारका ईश्वर सम्बन्धी रूप देखा, जो आपने प्रसन्न होकर मुझे ज्ञानचक्षु दिये॥२२॥ श्रीगजानन उवाच । नेदं रूपं महाबाहो मम पश्यन्त्ययोगिनः ॥ सनकाद्या नारदाद्याःपश्यन्ति मदनुग्रहात् २३ श्रीगणेशजी बोले,हे महाभुज ! योग न करनेवाले इस मेरे रूपका कभी भी दर्शन नहीं पाते, सनकादि नारदादि मेरे अनुग्रहसे इस रूपका दर्शन करते हैं ॥ २३ ॥ चतुर्वेदार्थतत्त्वज्ञाश्चतुःशास्त्रविशारदाः ॥ यज्ञदानतपोनिष्ठा न मे रूपं विदन्ति ते ॥२४॥ चारों वेदोंके अर्थके तत्त्व जाननेवाले सम्पूर्ण शास्त्रोंमें कुशल, यज्ञ, दान और तप करनेहारे भी मेरे रूपको नहीं जानते ॥ २४ ॥