गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (८९) देवा मनुष्या नागाद्याः खलास्त्वदुदरेशयाः ॥ नानायोनिभुजश्चान्ते त्वय्येव विशंति च १८ देवता मनुष्य नागादि और खल (दुष्ट) तुम्हारे उदरमें शयन करते हैं जो अनेक योनियोंको भोगकर अन्तमें तुममें प्रवेश करते हैं ॥ १८ ॥ अब्धेरुत्पद्यमानास्ते यथा जीमूतबिन्दवः ॥ त्वमिन्द्रोऽग्निर्यमश्चैव निर्ऋतिर्वरुणो मरुत् १९॥ जैसे सागरसे उत्पन्न हुए मेघके जलबिन्दु फिर उसीमें लीन होते हैं इसी कारण इन्द्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण, वायु, तुमही हो ॥ १९ ॥ गुह्यकेशस्तथेशानः सोमः सूर्योऽखिलं जगत् ॥ नमामि त्वामतः स्वामिन्प्रसादं कुरु मेऽधुना २० कुबेर, ईशान, सोम (चंद्र) और सम्पूर्ण जगत् सब तुमही हो, हे स्वामी ! मैं तुमको नमस्कार करता हूं, अब आप मेरे ऊपर कृपा करो ॥ २० ॥ दर्शयस्व निजं रूपं सौम्यं यत्पूर्वमीक्षितम् ॥ को वेद लीलास्ते भूमन् क्रियमाणा निजेच्छया २१