भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 520, कुल 656 में से

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पृष्ठ 520

५१८ * पुराणं हि गणेशस्य काममोक्षप्रदं नृणाम्* [ श्रीगणेशपुराण- 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 बालकोंके साथ खेल खेलो, नहीं तो तुम मेरे सामने | लोकोंको जला डालेगा। तथापि मैं संसारमें तुम्हारी ही मृत्युको प्राप्त हो जाओगे। मेरे तो चिल्लानेमात्रसे | कीर्तिको स्थापित करनेके लिये प्रसन्नचित्त होकर तुम्हारे तीनों लोक काँप उठते हैं॥ २५॥ | साथ युद्ध कर रहा हूँ। यदि ऐसा नहीं होता तो अभीतक मेरे द्वारा पैरको भूमिमें रख देनेमात्रसे शेषनाग भी | मैंने केवल हुंकारमात्रसे तुम्हें यमलोक पहुँचा दिया नीचेको दबने लगता है। मेरे द्वारा किये गये मुट्ठीके | होता॥ २९१/२ ॥ प्रहारमात्रसे बड़े-बड़े पर्वत चूर-चूर हो जाते हैं। मैं | ब्रह्माजी बोले—बालक मयूरेशके इन वचनोंको अपने नाखूनके अग्रभागसे ही तुम्हारे सिरको काटकर | सुनकर वह दैत्य कमलासुर क्रोधकी अग्निमें जलता रसातलमें पहुँचा दूँगा॥ २६१/२ ॥ | हुआ अत्यन्त व्याकुल हो उठा और उसने सिंहके समान ब्रह्माजी बोले—उस दुर्बुद्धि कमलासुर दैत्यके | गर्जना की, उस गर्जनाकी प्रतिध्वनिसे दिशाएँ तथा इस प्रकारके वचनोंको सुनकर गजानन बोले—तुम | विदिशाएँ निनादित हो उठीं। उस महान् शब्दसे तत्काल पिशाचकी भाँति और मद्यपान किये हुए व्यक्तिकी भाँति | अनेकों स्त्रियोंके गर्भ गिर पड़े॥ ३०-३१॥ मेरे सामने क्यों बकवास कर रहे हो, देवताओं तथा | मयूरेशकी सेनाके प्रमथ आदि बहुत-से गण ब्राह्मणोंकी निन्दा करनेवाला कभी भी विजय प्राप्त नहीं | मूर्च्छित होकर भूमिपर गिर पड़े। तदनन्तर दैत्य कमलासुरने कर सकता॥ २७-२८॥ | धनुषको कानतक खींचकर छोड़ा और मयूरेश तथा यदि मैं क्रुद्ध हो जाऊँगा तो मेरा वह क्रोध तीनों | उनकी सेनापर बाणोंकी भीषण वर्षा की॥ ३२॥ ॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणके क्रीडाखण्डमें 'कमलासुरके साथ मयूरेशके संग्रामका वर्णन' नामक एक सौ दोवाँ अध्याय पूर्ण हुआ॥ १०२॥ एक सौ तीनवाँ अध्याय कमलासुर और मयूरेशका भीषण युद्ध, कमलासुरके रक्तबिन्दुओंसे अनेक दैत्योंकी उत्पत्ति, देवी सिद्धि-बुद्धिकी सेनाके सैनिकोंद्वारा उन असुरोंका भक्षण, मयूरेश्वरद्वारा कमलासुरका वध और मुनिगणोंद्वारा की गयी मयूरेश्वर-स्तुति ब्रह्माजी बोले—उस दैत्य कमलासुरका वैसा | किया। तदनन्तर वह दैत्यराज कमलासुर ज्यों ही उत्कट पराक्रम देखकर देव मयूरेश अत्यन्त शीघ्रतासे | भागनेके लिये उद्यत हुआ, त्यों ही देव मयूरेशने उसकी उस दैत्यके सामने आये और बाणोंकी वर्षासे उसपर | चोटी पकड़कर पुनः उससे कहा—अरे दैत्येन्द्र! ठहर प्रहार करने लगे। दैत्य कमलासुरने भी अपने अत्यन्त | जाओ, अपने द्वारा कहे गये उन प्रगल्भ वचनोंका स्मरण शीघ्रगामी बाणोंसे मयूरेशद्वारा की गयी बाणवृष्टिको | करो और मुझसे युद्ध करो॥ ४-५॥ रोका। यह देखकर गुणोंको ग्रहण करनेवालोंमें श्रेष्ठ | तदनन्तर दैत्य कमलासुरने उन मयूरेशको जब भगवान् मयूरेश उसपर अत्यन्त सन्तुष्ट हुए॥ १-२॥ | अकेला ही अपने सामने खड़ा देखा, तब वह महाबली उन्होंने उस दैत्य कमलासुरको अपने विराट् | एकाएक युद्धके लिये दौड़ पड़ा और उसने महान् गर्जना विश्वरूपका दर्शन कराया। उस समय कमलासुरने दसों | की। तब दस आयुध धारण करनेवाले देव विघ्नराजने दिशाओंमें मयूरेशको ही देखा॥ ३॥ | उस समय उससे युद्ध आरम्भ कर दिया और शस्त्रोंके तब विस्मित होकर उसने अपने नेत्रोंको बन्द कर | आघातसे उसके शरीरको भेद डाला॥ ६-७॥ लिया और अपने हृदयदेशमें भी उन मयूरेशका ही दर्शन | उस कमलासुरके शरीरका रक्तबिन्दु जहाँ गिरता