गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| ९० | संक्षिप्त गरुडपुराण | [ आचार- |
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गेहूँकी फसलसे सम्पन्न (शस्य-श्यामल) भूमिका दान वेदविद् ब्राह्मणोंको जो देता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता। भूमिदानसे श्रेष्ठ दान न हुआ है और न होगा ही।
ब्राह्मणको विद्या प्रदान करनेसे ब्रह्मलोककी प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति प्रतिदिन ब्रह्मचारीको श्रद्धापूर्वक विद्या प्रदान करता है, वह सभी पापोंसे विमुक्त होकर ब्रह्मलोकके परमपदको प्राप्त करता है।
वैशाखमासकी पूर्णिमा तिथिको उपवास रखकर जो व्यक्ति पाँच या सात ब्राह्मणोंकी विधिवत् पूजा करके उन्हें मधु, तिल और घृतसे संतुष्ट करता है तथा उनकी गन्धादिसे भली प्रकार पूजा करके उनसे यह कहलवाता है या स्वयं कहता है—
प्रीयतां धर्मराजेति यथा मनसि वर्तते ॥
(५१। १३)
(हे धर्मराज ! मेरे मनमें जैसा भाव है, उसीके अनुकूल आप प्रसन्न हों।)
—ऐसा कहनेपर उसके जन्मभर किये गये समस्त पाप उसी क्षण विनष्ट हो जाते हैं।
जो व्यक्ति स्वर्ण, मधु एवं घीके साथ तिलोंको कृष्ण-मृगचर्ममें रखकर ब्राह्मणको देता है, वह सभी प्रकारके पापोंसे मुक्त हो जाता है।
वैशाखमासमें घृत, अन्न और जलका दान करनेसे विशेष फल प्राप्त होता है। अतः उस मासमें धर्मराजको उद्देश्य करके घृत, अन्न और जलका दान ब्राह्मणोंके लिये अवश्य करना चाहिये। ऐसा करनेसे सभी प्रकारके भयसे मुक्ति हो जाती है। द्वादशी तिथिमें स्वयं उपवास रखकर पापोंका विनाश करनेवाले भगवान् विष्णुकी पूजा करनी चाहिये। ऐसा करनेसे निश्चित ही मनुष्यके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। जो मनुष्य जिस देवताकी पूजा करनेके लिये इच्छा करता है, उसकी पूजा वह अपने इष्टको प्राप्त करनेके लिये करे और उसको उस देवकी प्रतिमूर्ति मानकर प्रयत्नपूर्वक ब्राह्मणोंकी पूजा करके उन्हें भोजन भी कराये। साथ ही सौभाग्यवती स्त्रियों तथा अन्य देवोंको भी पूजन-भोजनादिके द्वारा संतुष्ट करे।
संतान-प्राप्तिके इच्छुक व्यक्तिको इन्द्रदेवका पूजन करना चाहिये। ब्रह्मवर्चस्की कामना करनेवाला व्यक्ति ब्रह्मरूपमें ब्राह्मणोंको स्वीकार करके उनकी पूजा करे। आरोग्यकी इच्छावाला मनुष्य सूर्यकी तथा धन चाहनेवाला मनुष्य अग्निकी पूजा करे। कार्योंमें सिद्धि प्राप्त करनेकी अभिलाषा करनेवाला व्यक्ति विनायक (गणेश)—का पूजन करे। भोगकी कामना होनेपर चन्द्रमाकी तथा बल-प्राप्तिकी इच्छा होनेपर वायुकी पूजा करे। संसारसे मुक्त होनेकी अभिलाषा होनेपर प्रयत्नपूर्वक भगवान् हरिकी आराधना करनी चाहिये। निष्काम तथा सकाम सभी मनुष्योंको भगवान् गदाधर हरिकी पूजा करनी चाहिये।
जलदानसे तृप्ति, अन्नदानसे अक्षय सुख, तिलदानसे अभीष्ट संतान, दीपदानसे उत्तम नेत्र, भूमिदानसे समस्त अभिलषित पदार्थ, सुवर्णदानसे दीर्घ आयु, गृहदानसे उत्तम भवन तथा रजतदानसे उत्तम रूपकी प्राप्ति होती है।*
वस्त्र प्रदान करनेसे चन्द्रलोक तथा अश्वदान करनेसे अश्विनीकुमारके लोककी प्राप्ति होती है। अनडुह् (बैल)—का दान देनेसे विपुल सम्पत्तिका लाभ और गोदानसे सूर्यलोक प्राप्त होता है।
यान और शय्याका दान करनेपर भार्या तथा भयार्त (भयभीत)—को अभय प्रदान करनेसे ऐश्वर्यकी
* वारिदस्तृप्तिमाप्नोति सुखमक्षयमन्नद। तिलप्रदः प्रजामिष्टां दीपदाश्चक्षुरुत्तमम्॥
भूमिदः सर्वमाप्नोति दीर्घमायुर्हिरण्यदः। गृहदोऽग्र्याणि वेश्मानि रूप्यदो रूपमुत्तमम्॥ (५१। २२-२३)