गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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चित्र-सूची (इकरंगे)
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १- नैमिषारण्यमें सूतजीके द्वारा मुनियोंके प्रश्नोंका समाधान | ११ | १९- 'असिपत्रवन' नरकमें पापका फल | ४५८ |
| २- श्रीविष्णुके द्वारा गरुडको वरदान देना | १६ | २०- 'तप्तकुम्भ' नरकमें पापका फल | ४५९ |
| ३- प्रजापति रुचि और पितरोंका संवाद | १४७ | २१- 'सन्दंश, तप्तसूर्मि, वैतरणी, अन्धकूप, प्राणरोध और वज्रकण्टक-शाल्मली' नरकमें पापका फल | ४६० |
| ४- ब्रह्माजीद्वारा रुचिको वरदान देना | १४८ | २२- पुण्यगति प्राप्त प्राणीका स्वर्गगमन | ४६२ |
| ५- रुचिद्वारा दिव्य तेजोरशिका स्तवन | १५२ | २३- यमदूतोंके द्वारा कठोर यातना | ४७८ |
| ६- तेजोरशिका पितृगणके रूपमें प्रकट होना | १५३ | २४- यमलोकमें पहुँचा हुआ जीव | ४८२ |
| ७- प्रम्लोचाकी दिव्य कन्या मानिनीसे प्रजापति रुचिका विवाह | १५४ | २५- ब्राह्मण और प्रेतगणका संवाद | ४९२ |
| ८- माण्डव्य ऋषिद्वारा कौशिकको शाप देना | २४६ | २६- श्रीरामजीके द्वारा निमन्त्रित ऋषियोंको भोजन कराना | ५०३ |
| ९- गरुडपुराणका माहात्म्य बताना | ४४४ | २७- गोदानका माहात्म्य | ५१० |
| १०- क्षीरसागरमें श्रीविष्णु और देवगण | ४४५ | २८- दीपदानका माहात्म्य | ५२२ |
| ११- श्रीविष्णुद्वारा गरुडके प्रश्नोंका श्रवण | ४४७ | २९- जीवका यमपुरीमें प्रवेश | ५२४ |
| १२- मृत्युके समय यमदूतका प्राकट्य | ४५२ | ३०- ब्राह्मण संतसकके ऊपर पुष्प-वर्षा एवं देव विमानका आगमन | ५३३ |
| १३- किये गये अशुभ कर्मोंका फल | ४५४ | ३१- उदकुम्भदानका माहात्म्य | ५७३ |
| १४- 'रौरव' नरकमें पापका फल | ४५६ | ३२- योगनिद्रामें श्रीविष्णुकी स्तुति | ६०५ |
| १५- 'महारौरव' नरकमें पापका फल | ४५६ | ३३- श्रीकृष्णद्वारा कालिन्दीका पाणिग्रहण | ६२१ |
| १६- 'अतिशीत' नरकमें पापका फल | ४५७ | ३४- जाम्बवान्के द्वारा अपनी पुत्रीका समर्पण | ६२४ |
| १७- 'निकृन्तन' नरकमें पापका फल | ४५७ | ||
| १८- 'अप्रतिष्ठ' नरकमें पापका फल | ४५८ |