गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४६ | संक्षिप्त गरुडपुराण | [ आचार-
था। इसीलिये माण्डव्य ऋषि वेदनाके अनुभवसे स्वयंको बचानेकी दृष्टिसे समाधिस्थ हो गये थे।
कुष्ठ-व्याधियुक्त ब्राह्मण कौशिककी पतिव्रता पत्नी रातमें ही अपने पतिकी इच्छाके अनुसार वेश्याके यहाँ जा रही थी, इसलिये अन्धकार रहनेके कारण अपनी पत्नीके कन्धेपर बैठे कौशिकने माण्डव्य ऋषिको नहीं देखा और अपना पाँव स्वभावतः हिलाया-डुलाया। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि कौशिकके पाँवोंसे माण्डव्य ऋषि आहत हो गये और उनकी समाधि टूट गयी। समाधि-भंग होनेसे उन्हें असह्य वेदना होने लगी। इससे माण्डव्य ऋषिका क्रुद्ध होना स्वाभाविक था। अतः क्रोधवश उन्होंने शाप देते हुए कहा— जिसने मेरे ऊपर यह अपना पैर चलाया है, उसकी सूर्योदय होते ही मृत्यु हो जायगी। यह सुनकर उस ब्राह्मण-पत्नीने कहा कि (यदि ऐसी बात है तो) अब सूर्योदय ही नहीं होगा। इसके बाद सूर्योदय न होनेसे बहुत वर्षोंतक निरन्तर रात्रि ही छायी रही। जिससे देवता भी भयभीत हो गये।
देवताओंने ब्रह्माकी शरण ली। ब्रह्माने उन देवोंसे कहा कि पतिव्रताके इस तेजसे तो तपस्वियोंके तेजका भी ह्रास हो रहा है। पातिव्रत-धर्मके माहात्म्यसे सूर्यदेव उदित नहीं हो रहे हैं। उनके उदय न होनेसे मानवों और आप सभीको यह हानि उठानी पड़ रही है। अतः सूर्योदयकी कामनासे आप सब अत्रिमुनिकी धर्म-पत्नी तपस्विनी पतिपरायणा अनसूयाको प्रसन्न करें। वे ही सूर्योदय कराके पतिव्रता ब्राह्मणीके पतिको भी जीवित कर सकती हैं। ब्रह्माजीके कथनानुसार अनसूयाकी शरणमें जाकर देवताओंने उनकी प्रार्थना की। देवताओंकी प्रार्थनासे अनसूया प्रसन्न हो गयीं। अपने तपःप्रभावसे सूर्योदय कराके उन्होंने ब्राह्मणीके पति कौशिकको जीवित कर दिया। इन महातपस्विनी पतिव्रताकी अपेक्षा सीता और अधिक पतिपरायणा थीं।
(अध्याय १४२)
रामचरितवर्णन (रामायणकी कथा)
ब्रह्माजीने कहा— अब मैं रामायणका वर्णन करता हूँ, जिसके श्रवणमात्रसे समस्त पापोंका विनाश हो जाता है।
भगवान् विष्णुके नाभिकमलसे ब्रह्माकी उत्पत्ति हुई। ब्रह्मासे मरीचि, मरीचिसे कश्यप, कश्यपसे सूर्य, सूर्यसे वैवस्वत मनु हुए। वैवस्वत मनुसे इक्ष्वाकु हुए। इन्हीं इक्ष्वाकुके वंशमें रघुका जन्म हुआ। रघुके पुत्र अजसे दशरथ नामक महाप्रतापी राजाने जन्म लिया। उनके महान् बल और पराक्रमवाले चार पुत्र हुए। कौसल्यासे राम, कैकेयीसे भरत और सुमित्रासे लक्ष्मण तथा शत्रुघ्नका जन्म हुआ।
माता-पिताके भक्त श्रीरामने महामुनि विश्वामित्रसे अस्त्र-शस्त्रकी शिक्षा प्राप्तकर ताड़का नामक