गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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॥ श्रीहरिः ॥
विषय-सूची
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| आचारकाण्ड | २५- शिवके पवित्रारोपणकी विधि ............................ | ६६ | |
| १- भगवान् विष्णुकी महिमा तथा उनके अवतारोंका वर्णन .................................................... | ११ | २६- विष्णुके पवित्रारोपणकी विधि ........................... | ६७ |
| २- गरुडपुराणकी वक्तृ-श्रोतृ-परम्परा, भगवान् विष्णुद्वारा अपने स्वरूपका वर्णन तथा गरुडजीको पुराणसंहिताके प्रणयनका वरदान....................... | १३ | २७- ब्रह्ममूर्तिके ध्यानका निरूपण............................ | ६८ |
| ३- गरुडपुराणके प्रतिपाद्य विषयोंका निरूपण ................. | १६ | २८- विविध शालग्रामशिलाओंके लक्षण ...................... | ७० |
| ४- सृष्टि-वर्णन ..................................................... | १७ | २९- वास्तुमण्डल-पूजा-विधि ................................. | ७१ |
| ५- मानस-सृष्टि-वर्णन, दक्ष प्रजापतिद्वारा मिथुनधर्मसे सृष्टिका विस्तार ............................................. | १९ | ३०- प्रासाद-लक्षण .............................................. | ७४ |
| ६- ध्रुववंश तथा दक्ष प्रजापतिकी साठ कन्याओंकी संततियोंका वर्णन ............................................ | २१ | ३१- देव-प्रतिष्ठाकी सामान्य विधि ............................ | ७६ |
| ७- देवपूजा-विधान, विष्णुपूजोपयोगी वज्रनाभमण्डल, विष्णुदीक्षा तथा लक्ष्मी-पूजा ........................... | २४ | ३२- वर्ण एवं आश्रमधर्मोंका निरूपण ......................... | ८२ |
| ८- नवव्यूहार्चनविधि, पूजानुक्रम-निरूपण ..................... | २७ | ३३- संध्योपासन, तर्पण, देवाराधन आदि नित्य कर्मों तथा आशौचका निरूपण................................... | ८४ |
| ९- पूजानुक्रम-निरूपण ............................................. | २९ | ३४- दानधर्मका निरूपण एवं विभिन्न देवताओंकी उपासना ...................................................... | ८९ |
| १०- विष्णुपञ्जरस्तोत्र ............................................. | ३२ | ३५- प्रायश्चित्त-निरूपण.......................................... | ९१ |
| ११- ध्यान-योगका वर्णन ........................................ | ३३ | ३६- नवनिधियोंके लक्षणोंसे युक्त पुरुषके ऐश्वर्य एवं स्वभावका वर्णन.......................................... | ९३ |
| १२- विष्णुसहस्रनाम .............................................. | ३४ | ३७- भुवनकोशवर्णनमें राजा प्रियव्रतके वंशका निरूपण . | ९४ |
| १३- भगवान् विष्णुका ध्यान एवं सूर्यार्चन-निरूपण ...... | ३९ | ३८- भारतवर्षका वर्णन ........................................... | ९५ |
| १४- मृत्युञ्जय-मन्त्र-जपकी महिमा........................... | ४१ | ३९- प्लक्ष तथा पुष्कर आदि द्वीपों एवं पाताल आदिका निरूपण ............................................. | ९६ |
| १५- सर्पोंके विष हरनेके उपाय तथा दुष्ट उपद्रवोंको दूर करनेके मन्त्र (प्राणेश्वरी विद्या) ..................... | ४२ | ४०- भुवनकोश-वर्णनमें सूर्य तथा चन्द्र आदि नौ ग्रहोंके रथोंका विवरण ...................................... | ९७ |
| १६- पञ्चवक्त्र-पूजन तथा शिवार्चन-विधि..................... | ४५ | ४१- ज्योतिषक्रममें वर्णित नक्षत्र, उनके देवता एवं कतिपय शुभ-अशुभ योगों तथा मुहूर्तोंका वर्णन .... | ९९ |
| १७- भगवती त्रिपुरा तथा गणेश आदि देवोंकी पूजा-विधि ...................................................... | ४९ | ४२- ग्रहदशा, यात्राशकुन, छींकका फल तथा सूर्यचक्र आदिका निरूपण ................................ | १०१ |
| १८- सर्पों एवं अन्य विषैले जीव-जन्तुओंके विषको दूर करनेका मन्त्र .................................. | ५० | ४३- ग्रहोंके शुभ एवं अशुभ स्थान तथा उनके अनुसार शुभाशुभ फलका संक्षिप्त विवेचन.......... | १०३ |
| १९- श्रीगोपालजीकी पूजा, त्रैलोक्यमोहन-मन्त्र तथा श्रीधर-पूजन-विधि ......................................... | ५१ | ४४- लग्न-फल, राशियोंके चर-स्थिर आदि भेद, ग्रहोंका स्वभाव तथा सात वारोंमें किये जाने योग्य प्रशस्त कार्य ........................................... | १०४ |
| २०- पञ्चतत्त्वार्चन-विधि ......................................... | ५५ | ४५- सामुद्रिक शास्त्रके अनुसार स्त्री-पुरुषके शुभाशुभ लक्षण, मस्तक एवं हस्तरेखासे आयुका परिज्ञान ... | १०५ |
| २१- सुदर्शनचक्र-पूजा-विधि ..................................... | ५७ | ४६- स्त्रियोंके शुभाशुभ लक्षण ................................. | १०६ |
| २२- भगवान् हयग्रीवके पूजनकी विधि .......................... | ५८ | ४७- स्त्री एवं पुरुषोंके शुभाशुभ लक्षण ...................... | १०७ |
| २३- गायत्रीन्यास तथा संध्या-विधि ............................ | ६१ | ४८- चक्राङ्कित शालग्रामशिलाओंके विविध नाम, तीर्थमाहात्म्य तथा साठ संवत्सरोंके नाम ............ | ११२ |
| २४- देवी दुर्गाका स्वरूप, सूर्य-ध्यान तथा माहेश्वरीपूजन-विधि ........................................... | ६३ |