गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished634 पृष्ठ
पृष्ठ 7, कुल 634 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 7
[ ५ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ४९- स्वरोदय-विज्ञान | ११३ | ८०- श्राद्धके अवसर तथा अधिकारी, श्राद्धकी संक्षिप्त विधि, महिमा और फल | १७१ |
| ५०- रत्नोंके प्रादुर्भावका आख्यान तथा वज्र (हीरे)-की परीक्षा | ११४ | ८१- विनायकशान्ति-स्नान | १७४ |
| ५१- मुक्ताके विविध भेद, लक्षण और परीक्षण-विधि | ११७ | ८२- ग्रहशान्ति-निरूपण | १७६ |
| ५२-पद्मरागके विविध लक्षण एवं उसकी परीक्षा-विधि | १२० | ८३- वानप्रस्थ-धर्म-निरूपण | १७६ |
| ५३-मरकतमणिका लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि | १२२ | ८४- संन्यास-धर्म-निरूपण | १७७ |
| ५४-इन्द्रनीलमणिका लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि | १२४ | ८५- कर्मविपाक-निरूपण | १७८ |
| ५५- वैदूर्यमणिकी परीक्षा-विधि | १२५ | ८६- प्रायश्चित्त-विधान एवं सान्तपन, कृच्छ्र, पराक तथा चान्द्रायणादि व्रतोंका विविध स्वरूप | १७८ |
| ५६-पुष्पराजमणिकी परीक्षा -विधि | १२६ | ८७- अशौच तथा आपद्वृत्ति-निरूपण | १८३ |
| ५७- कर्केतनमणिकी परीक्षा-विधि | १२७ | ८८- महर्षि पराशरप्रोक्त वर्ण तथा आश्रम-धर्म एवं प्रायश्चित्त-धर्मका निरूपण | १८६ |
| ५८- भीष्मकमणिकी परीक्षा-विधि | १२७ | ८९- बृहस्पतिप्रोक्त नीतिसार | १८९ |
| ५९- पुलकमणिके लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि | १२८ | ९०- नीतिसार-निरूपण | १९१ |
| ६०- रुधिराक्ष रत्न-परीक्षा | १२८ | ९१- नीतिसार | १९५ |
| ६१- स्फटिक-परीक्षा | १२९ | ९२- राजनीति-निरूपण | १९७ |
| ६२- विद्रुममणिकी परीक्षा | १२९ | ९३- राजाद्वारा सेवकोंके लिये अपनायी जाने योग्य भृत्यनीतिका निरूपण | १९९ |
| ६३- गङ्गा आदि विविध तीर्थोंकी महिमा | १२९ | ९४- नीतिसार | २०१ |
| ६४- गया-माहात्म्य तथा गयाक्षेत्रके तीर्थोंमें श्राद्धादि करनेका फल | १३१ | ९५- नीतिसार | २०६ |
| ६५- गयाके तीर्थोंका माहात्म्य तथा गयाशीर्षमें पिण्डदानकी महिमामें विशालकी कथा | १३६ | ९६- नीतिसार | २१० |
| ६६- गयातीर्थमें पिण्डदानकी महिमा | १४० | ९७- तिथि आदि व्रतोंका वर्णन | २१६ |
| ६७- गयाके तीर्थोंकी महिमा तथा आदिगदाधरका माहात्म्य | १४१ | ९८- अनंगत्रयोदशीव्रत | २१७ |
| ६८- चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन तथा अठारह विद्याओंके नाम | १४३ | ९९-अखण्डद्वादशीव्रत | २१८ |
| ६९- प्रजापति रुचि और उनके पितरोंका संवाद | १४६ | १००- अगस्त्यार्घ्यव्रत-निरूपण | २१८ |
| ७०- रुचिद्वारा की गयी पितृस्तुति तथा श्राद्धमें इस पितृस्तुतिके पाठका माहात्म्य | १४८ | १०१- रम्भातृतीयाव्रत | २१९ |
| ७१- प्रम्लोचा नामक अप्सराकी दिव्य कन्या मानिनीसे प्रजापति रुचिका विवाह | १५३ | १०२- चातुर्मास्यव्रतका निरूपण | २२० |
| ७२- भगवान् विष्णुका अमूर्त ध्यानस्वरूप | १५४ | १०३- मासोपवासव्रतका निरूपण | २२१ |
| ७३- भगवान् विष्णुका मूर्त ध्यानस्वरूप | १५५ | १०४- भीष्मपञ्चकव्रत | २२१ |
| ७४- वर्णधर्म-निरूपण | १५५ | १०५- शिवरात्रिव्रतकथा तथा व्रत-विधान | २२२ |
| ७५- वर्णधर्म-निरूपण | १५७ | १०६- एकादशीमाहात्म्य | २२४ |
| ७६- गृहस्थधर्म-निरूपण | १५९ | १०७- विष्णुमण्डल-पूजाविधि | २२५ |
| ७७- वर्णसंकर जातियोंका प्रादुर्भाव, गृहस्थधर्म, वर्णधर्म तथा सैंतीस प्रकारके अनध्याय | १६३ | १०८- भीमा-एकादशीव्रत एवं माहात्म्य तथा पूजन-विधि | २२५ |
| ७८- द्रव्यशुद्धि | १६९ | १०९- व्रतपरिभाषा तथा व्रतमें पालन करने योग्य नियम और अन्य ज्ञातव्य बातें | २२६ |
| ७९- दान-धर्मकी महिमा | १७० | ११०- प्रतिपदा, तृतीया, चतुर्थी तथा पञ्चमीमें किये जानेवाले विविध तिथिव्रत | २२७ |
| १११-षष्ठी तथा सप्तमीके विविध व्रत | २३० | ||
| ११२-दूर्वाष्टमी तथा श्रीकृष्णमाष्टमी-व्रत | २३० |