भारतकोश
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
११३- बुधाष्टमीव्रत-कथा ....................................२३२१४७- पदार्थोंके गुण-दोष और औषधि-सेवनमें अनुपानका महत्त्व ....................................३११
११४- अशोकाष्टमी, महानवमी तथा नवमीके अन्य व्रत और ऋष्येकादशीव्रत-माहात्म्य ..............२३३१४८- ज्वर, अतिसार आदि रोगोंका उपचार ..............३१५
११५- श्रवणद्वादशीव्रत ....................................२३५१४९- नाडीव्रण, कुष्ठ आदि रोगोंकी चिकित्सा ..........३१९
११६- तिथिव्रत, वारव्रत एवं नक्षत्रादिव्रत-निरूपण और प्रतिपदादि तिथियोंमें पूजनीय देवता .........२३६१५०- स्त्रियोंके रोगोंकी चिकित्सा, ग्रहदोषके उपाय, ऋतुचर्या तथा पथ्यकारक सर्वौषधियाँ .............३२३
११७- सूर्यवंशवर्णन .......................................२३७१५१- मधुर, अम्ल और तिक्त आदि द्रव्योंका वर्ग तथा उनका औषधीय उपयोग .............................३२६
११८- चन्द्रवंशवर्णन .......................................२३९१५२- ब्राह्मीघृत आदि स्नेहपाकोंकी निर्माण-विधि तथा विविध रोगोंमें उनका उपचार ...................३२८
११९- भविष्यके राजवंशका वर्णन .........................२४४१५३- ज्वर-चिकित्सा ....................................३२९
१२०- भगवान्‌के विभिन्न अवतारोंकी कथा तथा पतिव्रता-माहात्म्यमें ब्राह्मणपत्नी, अनसूया एवं भगवती सीताके पातिव्रतका आख्यान ............२४४१५४- पलितकेश तथा कर्णशूलके उपचार ................३३०
१२१- रामचरितवर्णन (रामायणकी कथा) .............२४६१५५- नेत्र, नाक, मुख, गला, अनिद्रा तथा पादरोग और शस्त्राघातादिजनित रोगोंकी चिकित्सा .......३३१
१२२- हरिवंशवर्णन (श्रीकृष्णकथा) ....................२४९१५६- गर्भ-सम्बन्धी रोग, दन्त तथा कर्णशूल एवं रोमशमन आदिका उपचार ............................३३४
१२३- महाभारतकी कथा एवं बुद्ध आदि अवतारोंकी कथाका वर्णन .........................................२५०१५७- भोज्य पदार्थोंका विहित सेवनकाल, बल-बुद्धिवर्धक औषधियाँ तथा विषदोषशमनके उपाय ..३३६
१२४- निदानका अर्थ तथा रोगोंका सामान्य निदान-निरूपण ......................................२५२१५८- ग्रहणी, अतिसार, अग्निमान्द्य, छर्दि तथा अर्श आदि रोगोंका उपचार ................................३३७
१२५- ज्वर-निदान .......................................२५३१५९- सिध्म, अर्श, मूत्रकृच्छ्र, अजीर्ण तथा गण्डमाला आदि रोगोंकी औषधियाँ ...........................३३९
१२६- रक्त-पित्त-निदान .................................२६११६०- गणपतिमन्त्रका औषधिक योग तथा शोथ, अजीर्ण, विसूचिका और पीनस आदि विविध रोगोंके उपचार .......................................३४०
१२७- कास (खाँसी)-निदान ............................२६२१६१- प्रमेह, मूत्रनिरोध, शर्करा, गण्डमाला, भगंदर तथा अर्श आदि रोगोंका निदान ....................३४१
१२८- श्वासरोग-निदान ..................................२६४१६२- आयुर्वृद्धिकारी औषधिके सेवनकी विधि ..........३४२
१२९- हिक्कारोग-निदान .................................२६५१६३- व्रण आदि रोगोंकी चिकित्सा .......................३४३
१३०- राजयक्ष्मा-निदान .................................२६६१६४- पटल आदि नेत्ररोग, गुल्म, दन्तकृमि, विविध ज्वर तथा विषदोष-शमनके उपाय .......३४४
१३१- अरोचक, वमन आदि रोगोंका निदान ............२६८१६५- गण्डमाला, प्लीहा, विद्रधि, कुष्ठ, दद्रु, सिध्म, पीनस तथा छर्दि आदि विविध रोगोंका उपचार और सुगन्धित द्रव्योंके निर्माणकी विधि ..........३४४
१३२- हृदय-तृषारोगका निदान ..........................२७०१६६- सर्प, बिच्छू तथा अन्य विषैले जीव-जन्तुओंके विषकी चिकित्सा ...................................३४६
१३३- मदात्यय-निदान ..................................२७११६७- विविध स्नेह-पाकोंद्वारा रोगोंका उपचार, स्मरण तथा मेधाशक्तिवर्धक ब्राह्मीघृतादिके निर्माणकी विधि ..३४७
१३४- अर्श (बवासीर)-निदान ..........................२७४१६८- बुद्धि-शुद्धकर औषधि, विविध अभ्यङ्गों एवं उपयोगी चूर्णोंके निर्माणकी विधि, विरेचक
१३५- अतिसार-ग्रहणी-निदान ..........................२७८
१३६- मूत्राघात-निदान .................................२८०
१३७- प्रमेहरोग-निदान .................................२८३
१३८- विद्रधि एवं गुल्म-निदान .........................२८६
१३९- उदररोग-निदान ..................................२९०
१४०- पाण्डु-शोथ-निदान ..............................२९२
१४१- विसर्परोगका निदान ..............................२९३
१४२- कुष्ठरोगका निदान ...............................२९५
१४३- कृमि-निदान ......................................२९९
१४४- वातव्याधि-निदान ................................३००
१४५- वातरक्त-निदान .................................३०३
१४६- वैद्यकशास्त्रकी परिभाषा ..........................३०७