गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| काण्ड ] | श्रीकृष्णपत्नी देवी नीला (नाग्नजिती)-की कथा | ६१७ |
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नाम-रूपवाले विष्णु अनन्त गुणोंसे सम्पन्न हैं।
श्रीकृष्णने कहा— हे खगेश्वर ! जिस प्रकार हरिके अनन्त नाम-रूपात्मक अवतार हैं, उसी प्रकार हरिप्रिया भी विभिन्न अवतारोंके रूपमें प्रकट हुई हैं। वे लक्ष्मी ज्ञानस्वरूपा हैं। वे एकमात्र हरिके चरणोंका आश्रय ग्रहण कर नित्य उनके साथ रहती हैं। वे ही पुरुषकी पत्नी और प्रकृतिकी अभिमानिनी देवी हैं। जब ब्रह्माण्डके सृजनकी इच्छा हरिने की थी, उस समय गुणोंकी सृष्टि करनेके लिये ये प्रकृति नामसे प्रादुर्भूत हुई थीं। वासुदेवकी पत्नी माया, संकर्षणकी पत्नी जया, अनिरुद्धकी पत्नी शान्ता तथा प्रद्युम्नकी पत्नी कृतिके रूपमें इन्हींका अवतार हुआ। विष्णुकी पत्नी सत्त्वाभिमानिनी श्रीदेवी, तमोगुणकी अभिमानिनी देवी दुर्गा और रजोगुणकी अभिमानिनी वराहपत्नी देवी भूदेवी तथा भगवान् वेदकी अभिमानिनी देवी अन्नपूर्णा आदि सब इन्हीं देवीके अवतार हैं। साथ ही यज्ञपत्नी दक्षिणा, विदेहराजपुत्री सीता तथा रुक्मिणी, सत्यभामा आदि रूपोंमें भगवती लक्ष्मीका ही प्राकट्य हुआ है। इस प्रकार पृथक्-पृथक् देवी लक्ष्मीके अनन्त अवतार हुए हैं। ऐसे ही पाण्डवोंकी पत्नी द्रौपदी भी शची आदि देवियोंके रूपमें उत्पन्न हुई थीं। (अध्याय १५—१७)
भगवान् शेष तथा भगवान् रुद्रके विविध अवतार
श्रीकृष्णने कहा— भगवान् शेष अनन्त शक्तिसम्पन्न हैं। इनका आविर्भाव भगवान् हरि तथा रमादेवीके शयनके लिये हुआ है। योगनिद्रामें लक्ष्मीके साथ भगवान् नारायण शेषशय्यापर ही शयन करते हैं। 'मैं सर्वदा हरिका दास बना रहूँ और सदा उनकी पूजा करता रहूँ। मैं प्रत्येक जन्मोंमें हरिको नमस्कार करता रहूँ' इस इच्छासे गरुडने हरिके शयनस्थानके समीपमें आश्रय प्राप्त किया। विनताके पुत्र काल नामक गरुडका भगवान्के वाहनके रूपमें प्रादुर्भाव हुआ।
शेष भगवान् नारायणके भक्त हैं। उनमें विष्णु, वायु तथा अनन्त—इन तीन देवोंका अंश सदा विद्यमान रहता है। हे खग ! दशरथके पुत्रके रूपमें देवी सुमित्राके अंशसे जिन लक्ष्मणने जन्म लिया, वे शेषके ही अंश हैं, इसलिये शेषावतार कहे जाते हैं। भगवान् श्रीराम तथा देवी सीताकी सेवा करनेके लिये उनका पृथ्वीपर अवतार हुआ। वे ही शेष वसुदेवके पुत्रके रूपमें देवी रोहिणीसे बलभद्र नामसे अवतरित हुए। गरुडजीका पृथ्वीपर कोई अवतार नहीं हुआ, इसमें भगवान्की आज्ञा ही है। भगवान् रुद्रने भी अनेक रूप धारण किये हैं, वामदेव, ईशान, अघोर तथा सद्योजात आदि इनके कई अवतार हैं। इसी प्रकार आवेशावतार दुर्वासा तथा द्रोणपुत्र अश्वत्थामा आदि भी रुद्रके ही अंशावतार हैं। (अध्याय १८)
श्रीकृष्णपत्नी देवी नीला (नाग्नजिती)-की कथा
श्रीकृष्णने कहा— हे पक्षिराज ! कृष्णपत्नी नाग्नजिती पूर्वजन्ममें पितरोंमें श्रेष्ठ कव्यवाहकी पुत्री थी। वह कन्या पतिरूपमें भगवान् कृष्णका अनन्यचिन्तन किया करती थी। जब वह विवाहके योग्य हुई तो पिताने उसके विवाहके लिये बहुत प्रयत्न किया, किंतु उस कन्याने कृष्णके अतिरिक्त किसी अन्यको वरण न करनेका अपना निश्चय बताया, तब पिताने उससे कहा—किसी दूसरेको पतिरूपमें क्यों नहीं ग्रहण कर लेती हो ? तब उसने अपने पितासे कहा—'हे तात ! सर्वगुणसम्पन्न