गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 132, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ेंसानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि ६७
निषेधः। अपर आह—इह नित्यग्रहणात्पूर्वेषु तिलादिष्वनित्यः प्रतिषेध इति। तत्र वसिष्ठः—
कामं वा स्वयमुत्पाद्य तिलान्विक्रीणीरन्। इति ॥ १४ ॥
दास, दासी, वन्ध्या गाय, बछिया तथा गर्भ गिरा देने वाली गाय का विक्रय कभी भी (वैश्यवृत्ति वाला ब्राह्मण) न करे ॥ १४ ॥
भूमिव्रीहियवाजाव्यश्वऋषभधेन्वनडुहश्चैके ॥ १५ ॥
भूमिर्गृहम्। व्रीहियवाजाव्यश्वाः प्रसिद्धाः। ऋषभः सेचनसमर्थो गौः। धेनुः सकृत्प्रसूता। अनड्वान्नोवाहनयोग्यो बलीवर्दः। एते चापण्या इत्येके मन्यन्ते। एकशब्दाद्वयं त्वनुजानीमः। अत्राप्यजाविग्रहणं हिंसासंयोगविषयपरम् ॥ १५ ॥
कुछ आचार्यों का मत है कि भूमि, धान, जौ, बकरी, घोड़ा, साँड, एक बार ब्याई हुई गाय और बैल का विक्रय न करे ॥ १५ ॥
नियमस्तु ॥ १६ ॥
नियमो विनिमयः परिवर्तनं तुशब्देन नियमोऽनुज्ञायत इति ॥१६॥
किन्तु उपर्युक्त अविक्रेय पदार्थों का विनिमय (अदल बदल) कर सकता है ॥ १६ ॥
रसानां रसैः ॥ १७ ॥
तैलघृतगुडादीनां रसैरेव विनिमयः कार्यः। तद्यथा—
तैलं दत्त्वा घृतं ग्राह्यमिति रसैः समतो हीनतो वेति वसिष्ठः ॥ १७ ॥
रसों (तेल, घी, गुड आदि पदार्थों) का विनिमय रस से ही हो सकता है ॥ १७ ॥
पशूनां च ॥ १८ ॥
पशूनां चतुष्पदां पशुभिर्विनिमयः कार्यः ॥ १८ ॥
पशुओं का विनिमय भी पशुओं से ही करना चाहिए ॥ १८ ॥
न लवणकृतान्नयोः ॥ १९ ॥
लवणस्य कृतान्नस्य च विनिमयोऽपि प्रतिषिद्धः ॥ १९ ॥
नमक और बनाये हुए भोजन का विनिमय भी वर्जित है ॥ १६ ॥
तिलानां च ॥ २० ॥
तिलानां च विनिमयो न कार्यः। लवणकृतान्नतिलानां द्रव्यान्तरस्वो-