गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 131, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ें६६ गौतमधर्मसूत्राणि
भूतं पटटवस्त्रविशेषः । अजिनं चर्म कटादि । एतान्यविक्रेयाणि । शाणक्षौमयोर्विकारनिषेधात्प्रकृतेरप्रतिषेधः ॥ ९ ॥
गन्ध (चन्दन आदि), रस (तेल, घी, नमक, गुड़ आदि), बना हुआ भोजन (लड्डू आदि), तिल, सन से बने हुए पदार्थ, रेशमी वस्त्र, मृगचर्म और चटाई आदि अविक्रेय होते हैं ॥ ९ ॥
रक्तनिर्णिक्ते वाससी ॥ १० ॥
रक्तं लाक्षादिना विकृतम् । निर्णिक्तं रजकादिना धौतम् । एवंभूते अपि वाससी अपण्ये ॥ १० ॥
लाक्षा आदि रंगों से रंगे हुए और धोबी द्वारा धोए गये वस्त्र वैश्यवृत्ति वाला ब्राह्मण न बेचे ॥ १० ॥
क्षीरं सविकारम् ॥ ११ ॥
दध्यादिभिर्विकारैः सह क्षीरमपण्यम् ॥ ११ ॥
दही, घी आदि विकार के साथ दूध भी (वैश्यवृत्ति वाला ब्राह्मण न बेचे) ॥ ११ ॥
मूलफलपुष्पौषधमधुमांसतृणोदकापथ्यानि ॥ १२ ॥
मूलमार्द्रकहरिद्रादि । फलं पूगादि । पुष्पं चम्पकादि । औषधं पिप्पल्यादि । मधु माक्षिकम् । मांसतृणोदकानि प्रसिद्धानि । अपथ्यं विषादि । एतान्यपण्यानि । रसशब्देन पूर्वमेव निषिद्धेऽपि पुनर्मधुग्रहणं सर्वथा वृत्तिरशक्तावित्यादिपक्षे निषेधार्थम् ॥ १२ ॥
मूल (अदरख, हल्दी आदि), फल (पूग आदि), (चम्पक आदि) फूल, औषध, मधु, मांस, तृण, जल और विष आदि अपथ्य पदार्थ (वैश्यवृत्ति वाले ब्राह्मण को नहीं बेचने चाहिए) ॥ १२ ॥
पशवश्च हिंसासंयोगे ॥ १३ ॥
पशवोऽजादयः । हिंसासंयोगे सौनिकादिभ्यो हिंसार्थे न विक्रेयाः ॥ १३ ॥
हिंसा के लिए (बकरा आदि) पशु भी न बेचे ॥ १३ ॥
पुरुषवशाकुमारीवेहतश्च नित्यम् ॥ १४ ॥
पुरुषा दासादयः । वशा वन्ध्या गौः । कुमारी वत्सतरी । वेहद्गर्भोपघातिनी । एते नित्यमपण्याः । नित्यमित्युक्तत्वाद्विंसासंयोगादन्यत्रापि