भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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पृष्ठ 147
८२गौतमधर्मसूत्राणि

बछड़े को दूध पिलाती हुई गाय की बात दूसरे (गाय के स्वामी) से न कहे ॥ २४ ॥

न चैनां वारयेत् ॥ २५ ॥
न च स्वयमप्येनां वारयेदिति ॥ २५ ॥
और न स्वयं उस गाय को बछड़े से अलग करे ॥ २५ ॥

न मिथुनी भूत्वा शौचं प्रति विलम्बेत ॥ २६ ॥
मिथुनीभूय स्त्रियमुपगम्य शौचं प्रति न विलम्बेत। तत्क्षण एव कुर्यात्। शौचं त्वापस्तम्बेनाभिहितम्—उदकोपस्पर्शनमपि वा लेपान्प्र-क्षाल्याऽऽचम्य प्रोक्षणमङ्गानामिति ॥ २६ ॥
गृहस्थ सम्भोग करने के बाद (जलस्पर्श, आचमन आदि) शुद्धिकर्म करने में विलम्ब न करे ॥ २६ ॥

न च तस्मिन्शयने स्वाध्यायमधीयीत ॥ २७ ॥
यस्मिन्मिथुनमाचरितम् ॥ २७ ॥
उसी शय्या पर (जिस पर संभोग किये हो) वेदशास्त्र का अध्ययन न करे ॥ २७ ॥

न चापररात्रमधीत्य पुनः प्रतिसंविशेत् ॥ २८ ॥
यः पूर्वरात्रे सुप्त्वाऽपररात्र उत्थायाधीते। न स पुनः प्रतिसंविशेत्। कालदैर्घ्ये सति पुनर्न स्वप्याच्छेषां रात्रि जागृयादेवेति पुनर्ग्रहणात्पूर्वरात्रे-ऽसुप्तस्य स्वापे न दोषः ॥ २८ ॥
आधी रात के बाद निद्रा से उठकर अध्ययन करके फिर (रात्रि शेष रहने पर भी) न सोए ॥ २८ ॥

नाकल्पां नारीमभिरमयेत् ॥ २९ ॥
अकल्पां रोगादिनाऽस्वस्थां नारीं नाभिरमयेत्। नानया मिथुनी-भवेत् ॥ २९ ॥
रोग आदि से अस्वस्थ स्त्री के साथ संभोग न करे ॥ २६ ॥

न रजस्वलाम् ॥ ३० ॥
रजस्वलामपि नारीं नाभिरमयेत्। उदक्यागमने त्रिरात्रमिति प्राय-श्चित्तं वक्ष्यति तेनैव सिद्धे वचनमिदं त्रिरात्रादूर्ध्वमप्यनिवृत्ते रजसि गम-नप्रतिषेधार्थम् ॥ ३० ॥