गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished360 पृष्ठ
पृष्ठ 157, कुल 360 में से
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९२ | गौतमधर्मसूत्राणि
शश्वद्बहुकालं ब्रह्मलोकान्न च्यवते । द्विरुक्तिरध्यायसमाप्त्यर्था । पुनः स्नातकग्रहणं स्नातकधर्माणामेवैतत्फलं न गृहस्थधर्मसहितानामित्येवमर्थम् ॥ ७४ ॥
इस प्रकार आचरण करने वाला स्नातक अपने माता-पिता, उनके पूर्व के पितामह, मातामह आदि और बाद के पुत्र पौत्र आदि संबन्धियों को पापों से मुक्त करता हुआ चिरकाल तक ब्रह्मलोक से च्युत नहीं होता है (अर्थात् अनन्त काल तक ब्रह्मलोक में निवास करता है ) ॥ ७४ ॥
इति श्रीगौतमीयवृत्तौ हरदत्तविरचितायां मिताक्षरायां
नवमोऽध्यायः ॥ ६ ॥
प्रथमः प्रश्नः समाप्तः ।