गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 17, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ें( १२ )
६. मनुस्मृति के टीकाकार कुल्लूक ने गौतम के ३. ६. २ सूत्र को भी भविष्य-पुराण का बताया है।
७. 'तन्त्रवार्तिक' के लेखक कुमारिल ने गौतम के अनेक सूत्र उद्धृत किये हैं।
८. शंकराचार्य ने अपने वेदान्तसूत्रभाष्य ३. १. ८ में गौतम के २. २. २९ को तथा १. ३. ३८ में २. ३. ४ को उद्धृत किया है।
९. याज्ञवल्क्यस्मृति के टीकाकार विश्वरूप ने गौतम के कई सूत्रों का निर्देश किया है।
१०. मनुस्मृति के भाष्यकार मेधातिथि ने गौतम का उद्धरण अनेक स्थलों पर दिया है।
११. गौतमधर्मसूत्र में हिन्दूधर्म पर बौद्धों द्वारा किये गये आक्षेपों की ओर संकेत नहीं है।
इन सब उल्लेखों से गौतमधर्मसूत्र के काल के विषय में यह निष्कर्ष निकलता है कि यह सूत्र निश्चित रूप से उपर्युक्त सभी रचनाओं से पहले का है। गौतमधर्मसूत्र का समय यास्क के 'निरुक्त' के बाद आता है और जैसा कि म० म० काणे ने कहा है गौतम धर्मसूत्र की रचना के समय “पाणिनि का व्याकरण या तो था ही नहीं और यदि था तो वह तब तक अपनी महत्ता नहीं स्थापित कर सका था।” इस प्रकार यह निश्चित होता है कि गौतमधर्मसूत्र ईसापूर्व ४००-६०० के पहले रचा जा चुका था।
गौतम धर्मसूत्र में अन्य साहित्य का उल्लेख
गौतम धर्मसूत्र सभी धर्मसूत्रों में प्राचीनतम है इसका एक प्रमाण यह भी है कि इसमें किसी अन्य धर्मसूत्र का या धर्मसूत्रकार का निर्देश नामतः नहीं है किन्तु इसके पहले धर्मशास्त्र और उसके रचयिता विद्यमान थे इस बात की ओर बहुशः उल्लेख इसमें मिलता है। राजा के व्यवहार के साधन बताते समय २. २. १९ में कहा गया है—
“तस्य च व्यवहारो वेदो धर्मशास्त्राण्यङ्गान्यपवेदाः पुराणम्”।
इसी प्रकार त्रयी के साथ आन्वीक्षिकी का भी उल्लेख है :—
“त्रय्यामान्वीक्षिक्यां वाऽभिविनीतः” २. २. ३
अन्य धर्माचार्यों में केवल मनु के मत का महापातकों का वर्णन करते समय उल्लेख किया गया है। 'एके' 'इत्येके' 'एकेषाम्' शब्दों द्वारा उस समय के तथा पूर्ववर्ती धर्मशास्त्रकारों के मतों का उल्लेख किया गया है।
वैदिक संहिता एवं ब्राह्मण साहित्य का उल्लेख तो किया ही गया है, उपनिषद्, वेदान्त आदि का भी हवाला गौतमधर्मसूत्र में कई जगह मिलता है। यथा, ३. १. १२।