गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
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विपरीत मनु और याज्ञवल्क्य जैसे स्मृतिकारों को मानव से ऊपर दैवी शक्ति से संपन्न दर्शाया गया है।
४. धर्मसूत्र प्रायः गद्य में हैं या कहीं-कहीं मिश्रित गद्य और पद्य में हैं, किन्तु स्मृतियाँ श्लोकों में या पद्यबद्ध हैं।
५. भाषा की दृष्टि से धर्मसूत्र स्मृतियों के पहले के हैं और स्मृतियों की भाषा अपेक्षाकृत अर्वाचीन है।
६. विषयवस्तु के विन्यास की दृष्टि से भी उनमें भेद है। धर्मसूत्रों में विषय की व्यवस्था क्रम या तारतम्य का अनुसरण नहीं करती, किन्तु स्मृतियाँ अधिक व्यवस्थित और सुगठित हैं, उनमें विषयवस्तु मुख्यतः तीन शीर्षकों में विभक्त है—आचार, व्यवहार और प्रायश्चित्त ।
७. बहुत बड़ी संख्या में धर्मसूत्र अधिकतम स्मृतियों से प्राचीन हैं।
गौतम धर्मसूत्र
सभी धर्मसूत्रों में गौतम धर्मसूत्र सबसे प्राचीन है। यह केवल गद्य में है तथा इसमें श्लोक का कोई उद्धरण नहीं दिया गया है, जबकि दूसरे धर्मसूत्रों में श्लोक का उद्धरण आ जाता है। इसकी प्राचीनता के कई प्रमाण हैं :
१. सर्वप्रथम इसका उल्लेख बौधायनधर्मसूत्र में कई जगह किया गया है। यहाँ तक कि गौतमधर्मसूत्र का उन्नीसवां अध्याय अल्प परिवर्तित रूप में बौधायन-धर्मसूत्र में मिलता है और इन दोनों में बहुत से सूत्र एक दूसरे से मिलते-जुलते हैं। अनेक प्रमाणों से यह बात सिद्ध है कि बौधायन ने ही गौतमधर्मसूत्र से सामग्री ग्रहण की है।
२. इसी प्रकार वसिष्ठधर्मसूत्र में भी गौतमधर्मसूत्र से सामग्री ली गयी है। इसमें दो स्थानों ४. ३४ एवं ४. ३६ में गौतमधर्मसूत्र का उद्धरण है। इसके अतिरिक्त गौतमधर्मसूत्र का उन्नीसवां अध्याय वसिष्ठधर्मसूत्र में बाइसवें अध्याय के रूप में आता है। वसिष्ठधर्मसूत्र में कई सूत्र ठीक गौतमधर्मसूत्र में आये हुए सूत्रों के समान हैं जिनसे यह सिद्ध होता है कि गौतमधर्मसूत्र वसिष्ठधर्मसूत्र से पहले का है।
३. मनुस्मृति ३. १६ में गौतम का उल्लेख किया गया है और उन्हें उतथ्य का पुत्र बताया गया है।
४. याज्ञवल्क्यस्मृति १. ५ में उन्हें धर्मशास्त्रकारों में गिनाया गया है : “पराशरव्यासशंखलिखिता दक्षगौतमौ”।
५. अपरार्क ने 'भविष्यपुराण' से यह श्लोक उद्धृत किया है : “प्रतिषेधः सुरापाने मद्यस्य च नराधिप। द्विजोत्तमानामेवोक्तः सततं गौतमादिभिः॥” और यह सुरापान के विषय में ठीक गौतम के सूत्र के अनुरूप है।