गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१५४ गौतमधर्मसूत्राणि
नात्रिवर्षस्य कर्तव्या ब्राह्मणैरुदकक्रिया ।
जातदन्तस्य वा कुर्यान्नाम्नि चापि कृते सति ॥ इति ।
अग्न्युदकग्रहणमौर्ध्वदेहिकस्योपलक्षणम् । तत्र देवलो विशेषमाह—
द्वादशाद्वत्सरादर्वाक्पौगण्डमरणे सति ।
सपिण्डीकरणं न स्यादेकोद्दिष्टानि कारयेत् ॥ इति ॥ ३२ ॥
जिस मृत व्यक्ति का चूडान्त संस्कार किया गया हो उसे ही सपिण्डों द्वारा उदकदान दिया जाना चाहिए ॥ ३२ ॥
तत्स्त्रीणां च ॥ ३३ ॥
तदुदकदानं स्त्रीणां च कृतचूड़ानां कार्यम् ॥ ३३ ॥
जिन का चूडाकरण हुआ हो उन्हीं की स्त्रियों एवं पुत्रियों को मरने पर जल दिया जाय ॥ ३३ ॥
एके प्रत्तानाम् ॥ ३४ ॥
एके मन्यन्ते प्रत्तानामेव स्त्रीणामुदकदानमप्रत्तानां तु नैवेति । प्रत्तानां च भर्तृपक्षैर्देयम् ॥ ३४ ॥
कुछ आचार्यों का मत है कि विवाहिता स्त्रियों को ही मरने पर जल दिया जाय ॥ ३४ ॥
अथाऽऽशौचकाले ज्ञातयः कथं वर्तेरन्—
अधःशय्यासनिनो ब्रह्मचारिणः सर्वे ॥ ३५ ॥
भूमावेव शयीरन्नासीरंश्च न कटासनादिषु । मैथुनं च बर्जयेयुः । सर्वग्रहणं समानोदकार्थम् ॥ ३५ ॥
(आशौच काल में) सभी सपिण्ड भूमि पर ही सोवें और बैठें (चटाई और आसन आदि पर नहीं) तथा ब्रह्मचारी रहें (मैथुन से विरत रहें) ॥ ३५ ॥
न मार्जयीरन् ॥ ३६ ॥
मार्जनं गात्रमलापकर्षणम् । तच्च न कुर्युः ॥ ३६ ॥
शरीर की मैल न साफ करें ॥ ३६ ॥
न मांसं भक्षयेयुरा प्रदानात् ॥ ३७ ॥
प्रदानं श्राद्धम् । आ तदन्तं मांसं न भक्षयेयुः ॥ ३७ ॥
श्राद्ध समाप्त होने तक मांस का भक्षण न करे ॥ ३७ ॥