भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

पृष्ठ 219, कुल 360 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 219

१५४ गौतमधर्मसूत्राणि

नात्रिवर्षस्य कर्तव्या ब्राह्मणैरुदकक्रिया ।
जातदन्तस्य वा कुर्यान्नाम्नि चापि कृते सति ॥ इति ।
अग्न्युदकग्रहणमौर्ध्वदेहिकस्योपलक्षणम् । तत्र देवलो विशेषमाह—
द्वादशाद्वत्सरादर्वाक्पौगण्डमरणे सति ।
सपिण्डीकरणं न स्यादेकोद्दिष्टानि कारयेत् ॥ इति ॥ ३२ ॥

जिस मृत व्यक्ति का चूडान्त संस्कार किया गया हो उसे ही सपिण्डों द्वारा उदकदान दिया जाना चाहिए ॥ ३२ ॥

तत्स्त्रीणां च ॥ ३३ ॥

तदुदकदानं स्त्रीणां च कृतचूड़ानां कार्यम् ॥ ३३ ॥
जिन का चूडाकरण हुआ हो उन्हीं की स्त्रियों एवं पुत्रियों को मरने पर जल दिया जाय ॥ ३३ ॥

एके प्रत्तानाम् ॥ ३४ ॥

एके मन्यन्ते प्रत्तानामेव स्त्रीणामुदकदानमप्रत्तानां तु नैवेति । प्रत्तानां च भर्तृपक्षैर्देयम् ॥ ३४ ॥
कुछ आचार्यों का मत है कि विवाहिता स्त्रियों को ही मरने पर जल दिया जाय ॥ ३४ ॥

अथाऽऽशौचकाले ज्ञातयः कथं वर्तेरन्—

अधःशय्यासनिनो ब्रह्मचारिणः सर्वे ॥ ३५ ॥

भूमावेव शयीरन्नासीरंश्च न कटासनादिषु । मैथुनं च बर्जयेयुः । सर्वग्रहणं समानोदकार्थम् ॥ ३५ ॥
(आशौच काल में) सभी सपिण्ड भूमि पर ही सोवें और बैठें (चटाई और आसन आदि पर नहीं) तथा ब्रह्मचारी रहें (मैथुन से विरत रहें) ॥ ३५ ॥

न मार्जयीरन् ॥ ३६ ॥

मार्जनं गात्रमलापकर्षणम् । तच्च न कुर्युः ॥ ३६ ॥
शरीर की मैल न साफ करें ॥ ३६ ॥

न मांसं भक्षयेयुरा प्रदानात् ॥ ३७ ॥

प्रदानं श्राद्धम् । आ तदन्तं मांसं न भक्षयेयुः ॥ ३७ ॥
श्राद्ध समाप्त होने तक मांस का भक्षण न करे ॥ ३७ ॥

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित) · पृष्ठ 219, कुल 360 में से · BharatKosha