भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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पृष्ठ 228

सानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १६३

वसिष्ठः—उन्मत्तः किल्बिषी कुष्ठो पतितः क्लीब एव च ।
यक्ष्मामयावी च तथा न त्याज्यः स्यात्परोक्षितुम् ॥ इति ।
शातातपः—क्लीबे देशविनष्टे च पतिते प्रव्रजिते तथा ।
योगशास्त्राभियुक्ते च न दोषः परिवेदने ॥ इति च ।
त्यक्तात्मा साहसिक उद्वन्धनादौ प्रवृत्तः । दुर्वाळः खलतिः । वेष्टित-
शफे इत्यन्ये । कुनखी विना कारणेन विवर्णनखः । विनष्टनख इत्यन्ये ।
श्यावदन्तः स्वभावतः कृष्णदन्तः । श्वित्री श्वेतकुष्ठी । पौनर्भवो द्विरूढा
पुनर्भूस्तस्याः पुत्रः । कितवो द्यूतकरः कितं वातीति पणपूर्वजीवो वा ।
अजपो विहितस्य सावित्र्यादिजपस्याकर्ता । राजप्रेष्यो दूतादिः । प्राति-
रूपिकः कूटतुलामानादिव्यतिहारी । शूद्रापतिः सैव भार्या यस्य । निरा-
कृतिरस्वाध्यायः । श्रोत्रियानित्युक्तेऽपि पुनः प्रतिषेधाद्ब्राह्मण्याद्यवयवःशीलसंप-
त्तावप्यसत्यां गतौ ग्रहणं भवति । किलासस्त्वग्दोषो बलंडीति द्रविडानां
प्रसिद्धः । भूम्नि मत्वर्थीयः । कुसीदो वार्धुषिको वृद्ध्याजीवी । वैश्यवृत्त्या
वाणिज्योपजीवी वणिक्, वणिगुपजीवी । चित्रकर्मादिभिरुपजीवी शिल्पो-
पजीवी । शीलशब्दो ज्यादिभिः प्रत्येकं संबध्यते । ज्याशीलो धनुर्वेदोष-
जीवो । वादित्रशीलो भेर्यादिताडनवृत्तिः । तालशीलस्तालवृत्तिः । नृत्य-
गीतशीलौ च तथैतान्न भोजयेत् ॥ १८ ॥

कुण्ड (और गोलक-अवैध संबन्ध से उत्पन्न व्यक्तियों) का अन्न खाने
वाले, सोम बेचने वाले, किसी का घर जलाने वाले, ब्रह्मचर्य भंग करने वाले,
किसी गण के सेवक, जिन स्त्रियों से संभोग नहीं करना चाहिए उन (समान
प्रवर आदि की स्त्रियों) का संभोग करने वाले, हिंसा करने की रुचि वाले, बड़े
भाई के विवाह के पूर्व ही अपना विवाह करने वाले, छोटे भाई के विवाह के
बाद विवाहित, जिसके छोटे भाई ने उससे पहले अग्निहोत्राग्नि का आधान किया
हो, बड़े भाई के अग्निहोत्राग्नि का आधान करने के पूर्व स्वयं अग्नि का आधान
करने वाले, स्वयं अपने को आघात पहुँचाने वाले, गंजे व्यक्ति, भद्दे नाखूनों
वाले, काले दाँतों वाले, श्वेतकुष्ठ के रोगी, पुनर्भू (दुबारा ब्याही गई स्त्री)
के पुत्र, जुआड़ी, सावित्री आदि विहित मन्त्रों के जप का तिरस्कार करने वाले,
राजा के दूत आदि, कम तौलने तथा गलत तराजू रखने वाले, जिसकी एक
ही शूद्र जाति की पत्नी हो, दैनिक स्वाध्याय आदि का तिरस्कार करने वाले,
चर्म रोग से पीड़ित, ब्याज लेने वाले, व्यापारी, शिल्पी (चित्रकार आदि),
धनुष बाण द्वारा जीविका निर्वाह करने वाले, बाजा बजाकर जीविका निर्वाह
करने वाले, भेरी बजाने वाले, नृत्य एवं गान द्वारा जीविका चलाने वाले—
इन सबको (श्राद्ध में) भोजन नहीं देना चाहिए ॥ १८ ॥