गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 249, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ें१८२ | गौतमधर्मसूत्राणि
रजस्वला स्त्री द्वारा, और पैर से ( या चोंच से भी ) कौए द्वारा छुवा गया अन्न अभोज्य होता है ॥ १० ॥
भ्रूणघ्नाऽवेक्षितम् ॥ ११ ॥
भ्रूणहा ब्रह्महा । तथा च वसिष्ठः—'ब्राह्मणं हत्वा भ्रूणहा भवति' इति तेन प्रेक्षितमप्यभोज्यम् ॥ ११ ॥
भ्रूण की हत्या करने वाले ( ब्रह्महत्या करनेवाले ) द्वारा देखा गया अन्न अभोज्य होता है ॥ ११ ॥
भावदुष्टम् ॥ १२ ॥
भोजयित्राऽवज्ञानेन दत्तं भोक्तुर्वा मनसो दुष्टिकरं भावदुष्टम् । तदप्यभोज्यम् ॥ १२ ॥
खिलाने वाले ने जिसे तिरस्कारपूर्वक दिया हो अथवा जो भोजन करने वाले के मन को दूषित करता हो वह अन्न अभोज्य होता है ॥ १२ ॥
गवोपघ्रातम् ॥ १३ ॥
गवा चोपसमीपे घ्रातमभोज्यम् ॥ १३ ॥
जिसके निकट गौ ने सूँघ लिया हो वह अन्न अभोज्य होता है ॥ १३ ॥
शुक्तं केवलमदधि ॥ १४ ॥
यत्पक्वं कालवशादम्लरसं तत्केवलं शुक्तम् । तदभोज्यम् । केवलग्रहणात्क्षीरोदकादिसंपृक्तमम्लमपि भोज्यम् । दधि तु केवलमप्यम्लं भोज्यम् । तक्रकाञ्जिकयोरपक्वत्वान्नायं प्रतिषेधः । आचारोऽपि तक्रे निर्विवादः । काञ्जिके सविवादः ॥ १४ ॥
जो अन्न पकाकर रख दिया गया हो और कालवश खट्टा हो गया हो वह अभोज्य होता है, किन्तु दही खट्टा हो जाने पर भी भोज्य होता है ॥ १४ ॥
पुनः सिद्धम् ॥ १५ ॥
सकृत्पक्वस्य तादृश एव पाकः पुनः क्रियते पूर्वं शुक्तपकमिति तत्पुनःसिद्धम् । तदभोज्यम् । अन्यथापक्वस्य तु पाकान्तरे भर्जनादौ न दोषः ॥ १५ ॥
एक बार पकाये गए अन्न को यदि कुछ समय बाद पुनः उसी प्रकार पकाया जाय तो वह अभोज्य हो जाता है ॥ १५ ॥