भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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पृष्ठ 323

२५६ गौतमधर्मसूत्राणि

उसके बाद दस दिन केवल जल पीकर रहे और वह भी दिन में केवल एक बार प्रातःकाल ग्रहण करे, अपने वस्त्र निरन्तर भिगोये रखे, केश, नख, त्वचा, मांस, रक्त, स्नायु, अस्थि, मज्जा के लिये प्रतिदिन आठ आहुति इस मन्त्र से करे, 'आत्मा के मुख में मृत्यु के दाढ़ों में होम करता हूँ।' लोमानि आत्मनो मुखे मृत्योरास्ये जुहोमि स्वाहा' आदि ॥ ६ ॥

अथ भ्रूणहत्याया एवान्यत्प्रायश्चित्तमुच्यते— उक्तो नियमः ॥ ७ ॥

पयोव्रतो वेत्यादिर्वक्ष्यमाणोऽपि वेदितव्यः ॥ ७ ॥
अब ब्रह्महत्या के लिये दूसरा प्रायश्चित्त बताया जाता है ॥ ७ ॥

अग्ने त्वं पारयेति महाव्याहृतिभिर्जुहुयात्कूष्माण्डैश्चाऽऽ- ज्यम् ॥ ८ ॥

अग्ने त्वं पारयेत्यृचा महाव्याहृतिभिर्भूरादिभिः कूष्माण्डैर्यद्देवा देवहेडनमित्यादिभिश्च क्रमेण सकृदाज्यं जुहुयात् ॥ ८ ॥

'अग्ने त्वं पारय' इस ऋचा से, महाव्याहृतियों (भूअर् आदियों) के साथ कूष्माण्ड मन्त्रों से क्रमशः एक-एक बार आज्य होम करे ॥ ८ ॥

तद्व्रत एव वा ब्रह्महत्यासुरापानस्तेयगुरुतल्पेषु प्राणाया- मैस्तान्तोऽघमर्षणं जपन्सममश्वमेधावभृथेनेदं च प्रायश्चित्तम् ॥६॥

तद् व्रत एव वा तेनैव पयोव्रतो वेत्यादिना व्रतेनोपेतश्चतुर्षु ब्रह्महत्या- दिषु पापेषु प्रायश्चित्तं कुर्यात् । प्राणायामैस्तान्तो म्लानो यावद्भिः प्राणा- यामैस्तान्तो भवति तावद्भिः कुर्यादघमर्षणम् । अघमर्षणेन ऋषिणा दृष्टममृतं च सत्यं चेत्यादिनाऽघमर्षणम् । तच्चाश्वमेधावभृथेन समं तुल्यम् । जपन्निति वर्तमानप्रयोगेण प्रत्यहमेव त्रिंशद्रात्रं व्रतं कुर्यात् । अत्र मनुः- यथाऽश्वमेधः क्रतुराट् सर्वपापप्रणाशनः ।
तथाऽघमर्षणं सूक्तं सर्वपापप्रणाशनम् ॥ ९ ॥

ब्राह्मण की हत्या के लिए, सुरापान के लिए, सोने की चोरी और गुरु-पत्नीगमन के लिए वह वही व्रत करे, म्लान होने तक निरन्तर प्राणायाम करता हुआ रहे और अघमर्षण ऋषि द्वारा दृष्ट मन्त्र 'ऋतं च सत्यं च' मन्त्र का जप करे । यह प्रायश्चित्त अश्वमेध के अन्त में किये जानेवाले अवभृथ स्नान के तुल्य होता है ॥ ९ ॥