भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

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सानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि २६५

नमः । नमः कृष्णाय पिङ्गलाय नमः । नमो ज्येष्ठाय श्रेष्ठाय वृद्धायेन्द्राय हरिकेशायोर्ध्वरेतसे नमः । नमः सत्याय पावकाय पावकवर्णाय कामाय कामरूपिणे नमः । नमो दीप्ताय दीप्तरूपिणे नमः । नमस्तीक्ष्णाय तीक्ष्णरूपिणे नमः । नमः सौम्याय सुपुरुषाय महापुरुषाय मध्यमपुरुषायोत्तमपुरुषाय ब्रह्मचारिणे नमः । नमश्चन्द्रललाटाय कृत्तिवाससे नमः ॥ १२ ॥

नायमेको मन्त्रः । एताश्चाऽऽज्याहुतय इति बहुवचननिर्देशात् । किं तर्हि । त्रयोदशैते मन्त्राः । नमस्कारादयो नमस्कारान्ताश्च सर्वे । तत्र प्रथमे चतुर्थ्यन्तानि षड् देवस्य नामानि । द्वितीये चत्वारि । तथा तृतीये । चतुर्थे त्रयोदश । महते देवायति महादेवपदमेव व्यस्तमुक्तम् । पञ्चमादिषु त्रिषु द्वे । अष्टमे षट् । नवमे पञ्च । दशमे द्वे । तथैकादशे । द्वादशे षट् । त्रयोदशे द्वे । इति षट्पञ्चाशद्देवनामानि । एभिर्मन्त्रैस्तर्पणमनुसवनम् ॥ १२ ॥

अहंभाव को उत्पन्न करने वाले, मोह को उत्पन्न करनेवाले, दान देनेवाले, पाप का नाश करने वाले और तप करनेवाले पुनर्वसु को नमस्कार है । मुखवास की भेंट को, जल के तर्पण को ग्रहण करने वाले, धन जीतने वाले और विश्व की विजय करने वाले को नमस्कार है । सफलता देनेवाले को, पूरी सफलता देनेवाले को, महान् सफलता देने वाले को, प्रयत्नों को सफल बनाने वाले को नमस्कार है । पशुपति महान् देव, तीन आँखों वाले, अकेले विचरण करने वाले रुद्र को, अधिपति-हर को, शर्व को, ईशान को, उग्र को, वज्र धारण करने वाले, भयंकर जटाधारी को नमस्कार है । सूर्य और आदित्य को नमस्कार है । नीली ग्रीवा वाले, काले कण्ठ वाले को नमस्कार है । कृष्ण वर्ण वाले, भूरे वर्ण वाले को नमस्कार है । ज्येष्ठ को, श्रेष्ठ को, वृद्ध को, इन्द्र को, हरिकेश और ऊर्ध्वरेतस को नमस्कार है । सत्य, पावक, पावक वर्ण वाले काम और कामरूपी को नमस्कार है । दीप्त और दीप्तरूपी को नमस्कार है । तीक्ष्ण और तीक्ष्णरूपी को नमस्कार है । सौम्य को, सुन्दर पुरुष, महापुरुष, मध्यमपुरुष और उत्तम पुरुष ब्रह्मचारी को नमस्कार है । सिर पर चन्द्रमा धारण करनेवाले और चर्म धारण करने वाले को नमस्कार है ॥ १२ ॥

एतदेवाऽऽदित्योपस्थानम् ॥ १३ ॥

आदित्य उपस्थीयते येन तदादित्योपस्थानम् । एतेन कृत्स्नेन मन्त्रे-