गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished360 पृष्ठ
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( ७ )
| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| उत्तराधिकारी द्वारा न दिये जाने वाले ऋण | १२८ |
| धरोहर के नष्ट होने पर अपराधी न होना | १२८ |
| चोर द्वारा अपने अपराध की घोषणा | १२९ |
| इस प्रकार के चोर के लिये राजा द्वारा दण्ड | १२९ |
| ब्राह्मण के लिये शारीरिक दण्ड का निषेध | १२९ |
| ब्राह्मण के लिये विशेष प्रकार के दण्ड | १२९ |
| चोर को सहायता देने वाले का अपराध | १३० |
| पुरुष की शक्ति और अपराध के अनुरूप दण्ड | १३१ |
चतुर्थ अध्याय
| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| जटिल विवाद में साक्षियों की सहायता से निर्णय | १३२ |
| साक्षी के गुण | १३२ |
| साक्षी के लिये दोष या दण्ड का विचार | १३४ |
| धर्म की हानि का परिणाम | १३५ |
| साक्षी को असत्य भाषण से लगने वाला पाप | १३५ |
| असत्यभाषण से प्राणरक्षा होने पर दोष का अभाव | १३८ |
| न्यायकर्ता | १३८ |
| विवाद के निर्णय की अवधिसीमा | १३९ |
पंचम अध्याय
| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| मृत्युविषयक आशौच | १४१ |
| क्षत्रिय के लिये आशौच की अवधि | १४२ |
| वैश्य के लिये आशौच की अवधि | १४२ |
| शूद्र के लिये आशौच की अवधि | १४२ |
| दो आशौच लगने पर शुद्धि की अवधि | १४३ |
| अल्पकालीन आशौच | १४४ |
| जन्म का आशौच | १४६ |
| गर्भपात का आशौच | १४७ |
| मृत्युविषयक आशौच की कुछ अन्य दशायें | १४८ |
| पक्षिणी आशौच | १४९ |
| विभिन्न आशौच | १४९ |
| ब्रह्महत्याके दोषी आदि के छूने पर शुद्धि का नियम | १५१ |