गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 80, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ेंसानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि १५
पशुमण्डूकमार्जारश्वसर्पनकुलेषु । च ।
अन्तरागमने विद्यादनध्यायमहर्निशम्॥ इति ।
तद्धारणाध्ययनविषयम्। गौतमोयं तु ग्रहणाध्ययनविषयम् ॥ ६० ॥
कुत्ता, नेवला साँप, मेंढक और बिल्ली के ( गुरु और शिष्य के बीच में ) आ जाने पर शिष्य तीन दिन उपवास करे और गुरुकुल से पृथक् निवास करे ॥ ६० ॥
प्राणायामा घृतप्राशनं चेतरेषाम् ॥ ६१ ॥
इतरेषां श्वादिव्यतिरिक्तानां पश्वादीनामन्तरागमने प्राणायामास्त्रयः कार्या घृतप्राशनं च कार्यम्। एतत्सर्वं शिष्यस्य प्रायश्चित्तं न गुरोः, उभयोरित्यपरे ॥ ६१ ॥
( उपर्युक्त प्राणियों के अतिरिक्त ) अन्य पशुओं के गुरु और शिष्य के बीच में आने पर शिष्य ( तीन ) प्राणयाम करे और घी खावे। ( कुछ शास्त्रकारों के मतानुसार यह प्रायश्चित्त गुरु और शिष्य दोनों को ही करना चाहिए ) ॥ ६१ ॥
श्मशानाभ्यध्ययने चैवम् ॥ ६२ ॥
अभिरूपरिभावे श्मशानस्योपर्यध्ययने चैवं प्रायश्चित्तम्। प्राणायामा घृतप्राशनं चेति। द्विरुक्तिरध्यायपरिसमाप्त्यर्था ॥ ६२ ॥
इति श्रीगौतमीयवृत्तौ हरदत्तविरचितायां मिताक्षरायां प्रथमप्रश्ने प्रथमोऽध्यायः ॥
श्मशान के समीप अध्ययन करने पर भी यही प्रायश्चित्त ( प्राणायाम और घृतप्राशन ) करे ॥ ६२ ॥
गौतमधर्मसूत्र का प्रथम अध्याय समाप्त