भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

पृष्ठ 94, कुल 360 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 94

सानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि २९

( गुरु की आज्ञानुसार गुरुदक्षिणा प्रदान ) करके अथवा उनके द्वारा प्रसन्नतापूर्वक ( बिना दक्षिणा लिये ही ) आज्ञा दी जाने पर समावर्तन स्नान करे ॥ ५५ ॥

आचार्यः श्रेष्ठो गुरूणां मातेत्येके [ मातेत्येके ] ॥ ५६ ॥

गुरूणां पित्रादीनां मध्य उक्तलक्षण आचार्यः श्रेष्ठः । स हि विद्यातस्तं जनयति तच्छ्रेष्ठं जन्म। तेनानेकगुरुसमवाये स एव प्रथमं पूज्यः। एके त्वाचार्या माता श्रेष्ठेति मन्यन्ते । तथा च वसिष्ठः—
उपाध्यायाद्दशाऽऽचार्य आचार्याणां शतं पिता ।
पितुर्दशगुणं माता गौरवेणातिरिच्यते ॥
आपस्तम्बोऽपि—
माता पुत्रत्वस्य भूयाँसि कर्माण्यरभते तस्याँ शुश्रूषा नित्या पतितायामपि। द्विरुक्तिरध्यायपरिसमाप्त्यर्था ॥ ५६ ॥

इति श्रीगौतमीयवृत्तौ हरदत्तविरचितायां मिताक्षरायां
प्रथमप्रश्ने द्वितीयोऽध्यायः ॥

पिता आदि पूज्य जनों में आचार्य श्रेष्ठ होता है; किन्तु कतिपय आचार्यों का मत है कि माता ( सभी पूज्य जनों में ) श्रेष्ठ होती है ॥ ५६ ॥

गौतमधर्मसूत्र के प्रथम प्रश्न में द्वितीय अध्याय समाप्त ॥