गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)
Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary
महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[इ] श्लोक-सूची अ पृष्ठ संख्या आ पृष्ठ संख्या अङ्गेष्वाभरणं करोति २१९ आपादलम्बिनीमाला ३९ अङ्गे स्वेदः ११६ आवासो विपिनायते १६१ अक्ष्णोर्निक्षिपदञ्जनं ३४५ आश्लेषचुम्बन २०४ अमल कमल दल लोचन ४४ आश्लेषादनु चुम्बनादनु २०१ अभिनव जलधर ४६ इ अभिव्यक्तान्य तरुणी ८४ इतस्ततस्तामनुसृत्य १२७ अतिक्रम्यापाङ्ग श्रवणपथ ३६८ इति चटुल-चाटु-पटु ३१६ अत्रान्तरे च कुलटा २२३ इत्थं केलिततीर्विहृत्य ४१२ अत्रान्तरे मसृण-रोष ३०४ इहं रस-भणने कृत २५४ अथ सा निर्गत बाधा ३९६ ई अथ कथमपि यामिनीं २७२ ईषद् विकसितै गण्डैः ७७ अथ तां गन्तुमशक्तां २०९ ईषन्मीलितदृष्टि मुग्ध ३९५ अथागतां माधवमन्तरेण २३५ उ अधिगतमखिल-सखी ३३९ उन्मद मदन मनोरथ ६० अधर-सुधारसमुपनय ३८२ उन्मीलनमधुगन्ध ७१ अद्योत् सङ्ग वसद् भुजङ्ग ६९ उरसि मुरारेरुपहित १९४ अन्तर्मोहन-मौलि-घूर्णन २८७ उल्काभवति सा यस्या ५३,१०५ अनिल-तरल-किसलय ३३६ क अनिल-तरल-कुवलय २५८ कंसारिरपि संसार १२५ अनेक नारी परिरम्भ ७३ कति न कथितमिदम् २९४ अनुरागोऽनुरक्तायां १०८ कथित समयेऽपि २२५ अमृत-मधुर-मृदुतर २६० कन्दर्प ज्वर १७५ अलसनिमीलित ११२ कनक निकष रुचि २६२ अलिकुल गञ्जन ३९९ कर कमलेन करोमि ३७९ अविरल-निपतित १५४ करतल ताल तरल ८२ अहह कलयामि २३० कालिय विषधर ४१ अहमिह निवसामि २३२ कापिविलास विलोल ७९ अहमिह निवसामि १८१ कापि कपोल तले ८० कज्ज्वल मलिन विलोचन २७७