भारतकोश
गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary

महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 448 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 27

[ई] पृष्ठ संख्या पृष्ठ संख्या काश्मीर गौर वपु ३४६ चन्द्रक चारु मयूर ९६ किं करिष्यति १३० चरण कमल गलदलक्तक २७९ किं विश्राम्यसि कृष्ण २२१ चरण किसलये कमया २५२ किमिति विषीदसि २९५ चरण रणित मणि ११४ किशलय शयन तले ३७६ चिन्तयामि तदाननं १३१ किशलय शयन निवेशितया १११ चेष्टा भवति पून्नार्यो १०९ कुरु यदुनन्दन! चन्दन ३९७ छ कुसुम विशिख शर १५५ छलयसि विक्र्मणे १७,२५ कुसुम सुकुमार २३१ ज कुसुमचय रचित शुचि ३५० जनकसुताकृतभूषण ४५ कृष्णोऽपि तं दन्तवक्रं ५५ जनयसि मनसि २९७ केलिकला कुतुकेन ८१ जयश्रीविन्यस्तैर्महित ३७१ कोकिल कलरव ११३ जलदपटलबलबिन्दु ९९ क्लेशकर्म विपाका ९२ जित विस शकले मृदु २४९ क्षितिरति विपुलतरे १७,२१ त क्षत्रिय रुधिरमये १७,२६ तत्किं कामपि २३३ क्षणमपि विरहः १७७ तन्विखिन्नमसूचया १३३ क्षम्यतापरं १३५ तरल-दृगञ्चल-चलन ३६२ ग तवकरकमलवरे १७,२४ गणयति गुणग्रामं भ्रामं १०४ तवचरणेप्रणता ४७ गतवति सखीवृन्दे ३७५ तवेदं पश्यन्त्याः २८५ गोपकदम्ब नितम्बवती ९७ तस्याः पाटलपाणिजाङ्कित ३९१ घ तानिस्पर्शसुखानि १४५ घटयति सुघने कुच युग २४८ तामथ मन्मथ खिन्नां २९० घनचय रुचिरे रचयति २४६ तामहं हृदि सङ्ग १३२ घन जघन स्तन ३३४ तालफलादपि २९४ च तिर्यक् कण्ठ विलोल १४७ चञ्चल कुण्डल २४० त्वमसि मम भूषणं ३०९ चन्दन चर्चित नील ७४,७५ त्वां चित्तेन चिरं ३५५ त्यजति न पाणि तलेन १६७