भारतकोश
गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary

महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 448 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 29

[ऊ] पृष्ठ संख्या पृष्ठ संख्या भ्रूपल्लवो धनुरपाङ्ग १४१ र म रचय कुचयो पत्रश्चित्रं ४०६ मञ्जुतर-कुञ्जतल ३४९ रजनि-जनित-गुरु २७३ मणिमय मकर मनोहर १०१ रतिगृहजघने २५० मदन महीपति कनक ६२ रतिसुख समय ११५ मधु मुदित-मधुप-कुल ३५३ रतिसुखसारे १९० मधुमुर नरक विनाशन ४३ रमयति सुभृशं कामपि २५३ मधुरतर पिक-निकर ३५४ राधामुग्धमुखारविन्द २०५ मनोभवानन्दन २६५ राधावदन-विलोकन ३५८ मम मरणमेव वरमिति २२८ रासोल्लास भरेण ८८ मम रुचिरे चिकुरे कुरु ४०३ रिपुरिव सखी संवासोऽयं २६६ माध्विका परिमल ६५ ल मामतिविफलरुषा ३८४ ललित लवङ्ग लता ५६,५७ मामहह विधुरयति २२९ व मामियं चलिता विलोक्य १२९ वदनकमल-परिशीलन ३६३ माराङ्के रति-केलि-सङ्कुल ३९० वदन-सुधानिधि गलितम् ३८० मुखरमधीरं त्यज १९३ वदसि यदि किञ्चिदपि ३०५ मुग्धे विधेहि मयि ३१९ वपुरनुहरति तव-स्मर २७८ मुहुरवलोकित मण्डन २१३ वर्णित जयदेवकेन १३६ मृगमद-रस-वलितं ४०२ वसति दशनशिखरे १७,२२ मृगमद सौरभ ६१ वसति विपिन विताने १८६ मृदुचल मलय पवन ३५१ वसन्ते वासन्ती कुसुम ५१ मेघैर्मेदुरमम्बरं १ वहति च चलित १५६ म्लेच्छ निवह निधने १८,३१ वहति मलय समीरे १८४ य वहसि वपुषि विशदे १७,२९ यद्गान्धर्व-कलासु ४०८ वाग्देवताचरित ८ यदनुगमनाय निशि २२७ वाचः पल्लव १३ यदि हरि स्मरणे ११ विकसित-सरसिज २५९ यमुनातीर वानीर १५१ विकिरति मुहुः १९८ यह्रम्बुजाक्षापससार ५५ विगलित लज्जित ६३