गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)
Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary
महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ऋ] पृष्ठ संख्या पृष्ठ संख्या विगलित वसनं परिहृत १९५ श्रीजयदेव भणितम् ६७,८४, विचलदल कललितानन २३९ १०३,११७,१६०,१७० वितत बहु बल्लिनव ३५२ श्रीजयदेव-भणितमति २९८ वितरसि दिक्शरणे १७,२७ श्रीजयदेव-भणितमधरीकृत ३४१ विपुल पुलक पालिः २१७ श्रीजयदेव-भणितमिदमनुपद ३८५ विपुल-पुलक-पृथु २४१ श्रीजयदेव-भणित-रति २८४ विपुल-पुलक-भर ३६५ श्रीजयदेव-भणित-वचनेन २६४ विपुल पुलक भुज ९८ श्रीजयदेव भणित हरि २४३ विरचित-चाटु-वचन ३३१ श्रीजयदेव वचसि रुचिरे ४०५ विरह-पाण्डु-मुरारि २४४ श्रीजयदेवे कृत-हरि १९७ विलिखति रहसि १५७ श्रीभोजदेव प्रभवस्य ४१४ विशद कदम्बतले १०२ शृणुरमणीतरं ३३५ विश्वेषामनुरञ्जनेन ८५ श्लिष्यति कामपि चुम्बति ८३ विहरति वने राधा ९१ श्लिष्यति चुम्बति २१५ विहित पद्मावती सुख ३५४ श्वसित पवनमनुपम १६६ विहित विशद-विस २१३ स वृष्टि-व्याकुल गोकुलावन १७८ सकल-भुवन-जन-वर २६३ वेदानुद्धरते जगन्ति १८,३४ सजल-जलद-समुदय २६२ व्यथयति वृथा मौनं ३२२ सजल-नलिनीदल २९७ व्यालोलः केशपाशः ३९३ सञ्चरदधर सुधा ९३ श सत्यमेवासि यदि ३०८ शशिमुखे ! तव भाति ३२० समय-चकितं २०४ शशिकिरण-च्छुरितोदर ३६४ समर समरोचित विरचित २३७ शशिमुखि ! मुखरय ३८३ समुदित मदने रमणी २४५ शिखण्ड बर्होच्चय ५६ सरस घने-जघने-मम ४०४ श्यामल-मृदुल-कलेवर ३६१ सरस मसृणमपि १६५ श्रमजलकण-भर २४२ साकूत स्मितमाकुलाकूल १२२ श्रितकमलाकुच ३६,३८ साध्वी माध्वीक ४०९ श्रीजयदेवकविभणित विभव ३६७ सान्द्रानन्द पुरन्दरादि ३०१ श्रीजयदेवकवेरिदम् ३३,४८,२१७ सा रोमाञ्चति शीत्करोति १७१