भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 125

११६ बालकाण्ड 'कल प्रातःकाल होते ही रङ्गभूमिमें पहुँचकर लोग राम और लक्ष्मणको देख जी खोलकर नेत्रोंका लाभ लूटेंगे' ॥ १ ॥ महाराजके महल तथा नगरके बाहर-भीतर घर-घरमें यही चर्चा फैली हुई है। सब नर-नारी अपनी मनोरथसिद्धिसे आनन्दित हो प्रेमवश यही गाने लगते हैं ॥ २ ॥ विधाताकी गति समझकर सब लोग सोच करते हैं और आपसमें बिलखकर ऐसे वचन कहते हैं—'भाई ! बड़ा असमञ्जस आ पड़ा है, बालकोंकी तो किशोर अवस्था है और धनुष बड़ा ही कठोर है' ॥ ३ ॥ इस प्रकार सभी लोग अपने-अपने सुकृतोंका स्मरण कर, चित्तमें अपना-सा ही हित जान, पितृगण, देवता और शिव- विष्णु आदि ईश्वरोंके चरणोंमें सिर नवा रघुनाथजीके हाथसे धनुर्भंग होनेकी अभिलाषा करते हैं ॥ ४ ॥ स्त्रियां कनसुई* लेती फिरती हैं और [पुरुष] गणक (ज्योतिषी) बुलाकर शकुन पूछते हैं। उनसे अनुकूल उत्तर सुनकर वे प्रसन्न मनसे दौड़कर धैर्य धारण करते हैं ॥ ५ ॥ महाराज जनक एक-एकसे श्रीविश्वामित्रजीका प्रभाव बतलाकर उनकी कथा सुनाते हैं और कहते हैं कि जान पड़ता है, विधाताने सीता और रामका संयोग निश्चय करके रचा है ॥ ६ ॥ कोई उत्साह बढ़ाकर सुबाहुका मथन करनेवाली भगवान् रामकी भुजाओंकी सराहना कर करते हैं—'भाई ! रघुनाथजी निश्चय ही धनुष चढ़ाकर भाई लक्ष्मणसहित राजसभा में विराजमान होंगे ॥ ७ ॥ क्योंकि इस बड़ी सभामें रघुनाथजीको छोड़कर और ऐसा कौन योग्य *शकुनविचारकी एक रीति, जिसमें स्त्रियां गोबरकी गौरी बनाकर चलनीमें रख पृथ्वीपर फेंकती हैं। यदि वह सीधी गिरे तो शुभ और उलटी या आड़ी गिरे तो अशुभ मानी जाती है।

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक) · पृष्ठ 125, कुल 454 में से · BharatKosha