गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
DevanagariHindipublished454 पृष्ठ
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| पद-सूचना | पृष्ठ-संख्या | पद-सूचना | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| भोर भयो जागेहु रघुनंदन ! | ७७ | मेरो सुनियो, तात ! | .... २८२ |
| भोर फूल बीनबेको | १२० | मेरो सब पुरुपारथ थाको | .˙. ३६० |
| भोर जानकीजीवन जागे | .... ३८२ | मैं तुम्हसों सतिभाव | |
| मंजुल मंगलमय नृप ढोटा | .... १०० | कही है | .... १८१ |
| मंजु मूरति-मंगलमई | .... ३३६ | मोको बिधुबदन | .... १८३ |
| मनमें मंजु मनोरथ हो, री ! | १६५ | मोहि भावति, कहि आवति | .... २६० |
| मनोहरताके मानो ऐन | .... १६५ | मोपै तौ न कछू ह्वै आई | .... ३५६ |
| महाराज राम पहं जाऊँगी | .... ३२६ | या सिसुके गुन नाम बड़ाई | .... ४८ |
| माथे हाथ ऋषि जब दियो | .... ४६ | ये अवधेसके सुत दोऊ | .... १०८ |
| मातु सकल, कुलगुर बधू | .... ४८ | ये दोऊ दसरथके वारे | .... ११४ |
| माई ! मनके मोहन | , १६२ | ये उपही कोउ कुँवर | |
| माई री ! मोहि कोउ | .. २३४ | अहेरी | .... २१६ |
| मातु काहेको कहति | ३०१ | रंग-भूमि भोरे ही जाइकै | .... ११८ |
| मानु अजहू सिख | .... ३५२ | रंगभूमि आये दसरथके | . १२३ |
| मिलो बरु सुंदर | १३२ | रघुबर बाल-छबि कहौं | .... ६५ |
| मुनिके संग बिराजत बीर | ... ६७ | रहे ठगिसे नृपति | .... ६४ |
| मुनि पदरेनु रघुनाथ माथे | , १५० | रहि चलिये सुंदर | |
| मुदित-मन आरती करै माता | १७३ | रघुनायक | .... १७६ |
| मुएहु न मिटैगो मेरो | २३८ | रहहु भवन हमरे कहे | .... १७८ |
| मुनिबर करि छठीं कीन्ही | ... ४४० | रघुपति! मोहि संग किन लीजैं? | २५३ |
| मेरे बालक कैसे धौं मग | .... १५६ | रघुबर दूरि जाइ मृग मारयौ | २७३ |
| मेरे यह अभिलाषु | रजायसु रामको जब पायो | .... २८१ | |
| बिधाता | .... २३६ | रघुपति ! देखो आयो | |
| मेरो अवध धौं कहहु, कहा हैं | २४४ | हनुमंत | ३१० |
| मेरे एको हाथ न लागी | .... २७६ | रघुकुलतिलक ! बियोग | |
| मेरे जान तात ! कछू | .... २८१ | तिहारे | .... ३१३ |