भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 26

गीतावली २०

चैत चारु नौमी तिथि सितपख, मध्य-गगन-गत भानु । नखत जोग ग्रह लगन भले दिन मङ्गल-मोद-निधान ॥ २ ॥ व्योम, पवन, पावक, जल, थल, दिसि दसहु सुमङ्गल-मूल । सुर दुन्दुभी बजावहिं, गावहिं, हरषहिं, बरषहिं फूल ॥ ३ ॥ भूपति-सदन सोहिलो सुनि बाजैं गहगहे निसान । जहँ-तहँ सर्जाहिं कलस धुज चामर तोरन केतु बितान ॥ ४ ॥ सींचि सुगन्ध रचैं चौकें गृह-आँगन गली-बजार । दल फल फूल दूध दधि रोचन, घर घर मङ्गलाचार ॥ ५ ॥ सुनि सानन्द उठे दसस्यन्दन सकल समाज समेत । लिए बोलि गुर-सचिव-भूमिसुर, प्रमुदित चले निकेत ॥ ६ ॥ जातकरम करि, पूजि पितर-सुर, दिए महिदेवन दान । तेहि औसर सुत तीनि प्रगट भए मङ्गल, मुद, कल्यान ॥ ७ ॥ आनँद महँ आनन्द अवध, आनन्द बधावन होइ । उपमा कहौं चारि फलकी, मोहिं भलो न कहैं कबि कोइ ॥ ८ ॥ सजि आरती बिचित्र थार कर जूथ जूथ बरनारि । गावत चलीं बधावन लै लै निज निज कुल अनुहारि ॥ ६ ॥ असही दुसही मरहु मनहि मन, बैरिन बढ़हु बिषाद । नृपसुत चारि चारु चिरजीवहु सङ्कर-गौरि-प्रसाद ॥ १० ॥ लै लै ढोव प्रजा प्रमुदित चले भाँति भाँति भरि भार । करहिं गान करि आन रायकी, नाचहिं राज दुवार ॥ ११ ॥ गज, रथ, बाजि, बाहिनी, बाहन सबनि सँवारे साज । जनु रतिपति ऋतुपति कोसलपुर बिहरत सहित समाज ॥ १२ ॥ घण्टा-घण्टि, पखाउज-आउज, झाँझ, बेनु डफ-तार । नूपुर धुनि, मञ्जीर मनोहर, कर कङ्कन-झनकार ॥ १३ ॥