भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

१९ बालकाण्ड स्वाभाविक शृङ्गार किये तरह-तरहकी मङ्गलसामग्री लिए चली आ रही हैं। वे गाती हैं और प्रसन्न चित्तसे आशीर्वाद देती हैं कि यह सुखदायक बालक चिरजीवी हों ॥ ७॥ गलियोंमें केसरकी कीच मच रही है तथा अरगजा, अगर और अबीर उड़ रहा है। पुरके नर- नारी प्रेममें भरकर नाच रहे हैं और उन्होंने अपने शरीरकी सुधभी भुला दी है ॥ ८ ॥ महाराज दशरथ अगणित वस्त्र, हाथी, घोड़े, गौ, मणि और सुवर्ण आदि अधिक परिमाणमें दे रहे हैं। जिसके लिए जो चीज उचित है, उसे वही दान कर रहे हैं। इस समय सारी सिद्धियाँ उनके घर-आ गयी हैं ॥ ९ ॥ इस समय देवता, साधुजन और ब्राह्मण तो प्रसन्न हो रहे हैं, किन्तु दुष्टोंका मन मलिन है; जिस प्रकार सूर्योदय होनेपर सभी पुष्प खिल जाते हैं किन्तु कुमुदवन मुरझा जाता है ॥१०॥ जिस आनन्द-समुद्रकी एक बूंदसे ही शिवजी और ब्रह्माजीका जगत्‌में प्रभुत्व है, वही सुखसागर इस समय अवधपुरीमें दसों दिशाओंमें उमड़ रहा है। उसका वर्णन मैं किस प्रकार गाकर करूँ ? ॥ ११ ॥ जो श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंका चिन्तन करनेवाले हैं यहाँ उनकी गति स्पष्ट दिखायी पड़ रही है। हे प्रभो! तुलसीदासने भी आपकी अविरल, अमल और अनुपम सुदृढ़ भक्ति प्राप्त की है ॥ १२ ॥ राग जैतश्री [ २ ] सहेली सुनु सोहिलो रे ! सोहिलो, सोहिलो, सोहिलो, सोहिलो सब जग आज । पूत सपूत कोसिला जायो, अचल भयो कुल-राज ॥ १ ॥

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक) · पृष्ठ 25, कुल 454 में से · BharatKosha