गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगीतावली २२ अरी सखी ! सोहिला (बधाईके गीत) तो सुन । अहा ! आज सारे जगत्में सोहिला-ही-सोहिला हो रहा है । आज कौसल्याने एक सपूत बालकको जन्म दिया है, जिससे उसका कुख और राज अविचल हो गया है ॥ १ ॥ आज चैत्र शुक्ला नवमी तिथि है, सूर्यदेव मध्य आकाशमें प्रकाशमान हो रहे हैं, आजके शुभ दिनमें नक्षत्र, योग, ग्रह और लग्न सभी अच्छे हैं और आजका दिन मङ्गल और मोदका घर है ॥ २ ॥ आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और दसों दिशाएँ मङ्गलमूल हो रही हैं तथा सुरगण दुन्दुभी बजाकर गाते और प्रसन्न होकर फूलोंकी वर्षा करते हैं ॥ ३ ॥ महाराज दशरथके घर सोहिला होता सुन सब ओर नक्कारोंकी गम्भीर ध्वनि होने लगी है तथा जहाँ.तहाँ कलश, ध्वजा, चँवर, तोरण, पताका और मण्डप सजाये जा रहे हैं ॥४॥ घर, आँगन, गली और बाजारोंको सुगन्धित जलसे सींचकर उनमें चौक पूरे जा रहे हैं तथा घर-घरमें पत्र, पुष्प, फल, दूब, दही और रोली आदि सामग्रियोंसे मङ्गलाचार हो रहा है ॥ ५ ॥ पुत्र-जन्मका समाचार सुन महाराज दशरथ सम्पूर्ण राजदरबारके सहित उठ खड़े हुए और गुरु, मन्त्री एवं ब्राह्मणोंको बुलाकर प्रसन्नतापूर्वक महलकी ओर चल पड़े ॥६॥ वहाँ पुत्रका जातकर्म-संस्कार कर पितृगण और देवताओंकी पूजा की तथा ब्राह्मणोंको दान दिया । इसी समय उनके मङ्गल, आनन्द और कल्याणस्वरूप तीन पुत्र और उत्पन्न हुए ॥ ७ ॥ आज अयोध्यामें आनन्दमें आनन्द हो गया और चारों तरफ आनन्दका ही बधावा हो रहा है । यदि मैं उन्हें [अर्थ, धर्म, काम और मोक्षरूप] चार फलोंकी उपमा दूँ तो मुझे कोई कवि भला नहीं कहेगा । [क्योंकि चार