भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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गीतावली २८ छठी-बारहौं लोक-वेद-बिधि करि सुबिधान बिधानी । राम-लषन-रिपुदवन-भरत धरे नाम ललित गुरग्यानी ॥ १२ ॥ सुकृत-सुमन तिल-मोद बासि बिधि जतन-जन्त्र भरि घानी । सुख-सनेह सब दिये दसरथहि खरि खलेल-थिर थानी ॥ १३ ॥ अनुदिन उदय-उछाह, उमग जग, घर-घर अवध कहानी । तुलसी राम-जनम-जस गावत सो समाज उर आनी ॥ १४ ॥ देवतालोग अति विशुद्ध और सुन्दर वाणीमें गाते हैं—महारानी कौसल्याने जो पुत्र उत्पन्न किया है, वह करोड़ों भुवनोंके कल्याणका मूल ही है ॥१॥ मास, पक्ष, तिथि, वार, नक्षत्र, ग्रह, योग और लग्न सभी बहुत शुभ आ बने हैं । जल, थल, आकाश और साधुओंके हृदय प्रसन्न हैं तथा दसों दिशाओंमें उल्लास भरा हुआ है ॥२॥ पुष्पोंकी वर्षा हो रही है तथा आकाश और नगरमें बधावा हो रहा है । इस समयका हर्ष कहा नहीं जाता । जैसा आनन्द रनिवास और महाराजको है वैसा ही सारे देश और राजधानीको भी है ॥३॥ देवता, नाग, मुनि, मनुष्य और परिजन सभी विषादऔरग्लानिसे रहित होगये हैं तथा इसके साथ ही रावण और राक्षसोंके सहित सम्पूर्ण लङ्कापुरी शङ्कितहोकरव्याकुल हो रही है ॥४॥ महाराजने देवता, पितर, गुरु और ब्राह्मणोंका पूजन कर तथा उनकी रुचि जानकर दान दिये हैं । मुनि- पत्नियों, पुरनारियों और सुवासिनियोंका हजारों प्रकारसे सम्मानकिया है ॥५॥ याचकलोग भरपूर द्रव्य पाकर दानी हो गये हैं, वेद्वारसे निकलते हुए आशीर्वाद देते हैं कि कैकेयी और सुमित्रापर भी भगवान् शङ्कर और पार्वतीजी इस प्रकार प्रसन्न हों ॥६॥ इसके दूसरे ही दिन वे दोनों राजरानियाँ भी [भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्नजीके जन्म लेनेसे