गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 35, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२६ बालकाण्ड मङ्गलकी खानि हो गयीं। इस प्रकार सोहिलेमें सोहिला हो रहा है, मानो सारी सृष्टि ही सोहिलेमें सनी हुई है ॥७॥ सब लोग नाच-गा रहे हैं, यह मेरे मन को भाता है, सुखसे अयोध्याकी शोभा और बढ़ गयी है। सम्पूर्ण प्रजा आनन्दमें अघाकर लोगोंको (उपहार) देती और स्वयं लेती है, लोग स्वयं वस्त्राभूषण पहनते हैं और दूसरोंको पहनाते हैं ॥८॥ गान तथा बाजोंके शोरका कुतूहल देखकर सारी दुनिया सिहा रही है। विष्णु, ब्रह्मा और महादेवजीकी पुरियोंकी भी सारी शोभा कोसलपुरीपर लुब्ध हो रही है ॥९॥ सब राजमहिलाएँ अति आनन्दित हैं, क्योंकि (पति- सुखसे] उनकी माँग और [पुत्रजन्मसे] कोख धन्य हो गयी है। पार्वतीजी, लक्ष्मीजी और ब्रह्माणी भी आशीर्वादि देती हुई आदरपूर्वक उनके भाग्यकी प्रशंसा कर रही हैं ॥१०॥ महाराज दशरथके वैभव और विलासकी वृद्धि देखकर जिन्हें अच्छी नहीं लगी उनपर कीर्ति, कुशल, वैभव और ऋद्धि-सिद्धि सभी कुपित हो गयीं ॥११॥ विधिवेत्ता वसिष्ठजीने लोक और वेदकी विधिसे सब विधान करते हुए छठी- बरहीकी और उन ज्ञानी गुरुदेवने उन बालकोंके राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत—ये अति सुन्दर नाम रखे ॥१२॥ इस समय विधाताने मोदरूपी तिलोंको सुकृत ( पुण्य ) रूप पुष्पोंकी गन्धमें बसाकर उन्हें यत्नरूप यन्त्रोंमें पेरकर उनसे निकला हुआ सुखरूप स्नेह तो दशरथजीको दिया है तथा [ सांसारिक सुखरूप ] खली और मैल दिक्पालोंको दिये हैं ॥१३॥ प्रतिदिन सम्पूर्ण जगत्में भगवान्के