भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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४०६ उत्तरकाण्ड काम-तून-तल-सरिस जानु जुग, उरु करिकर, करभहि बिलखावति। रसना रचित रतन चामीकर, पीत बसन कटि कसे सरसावति ॥ ५ ॥ नाभी सर, त्रिवलीनिसेनिका, रोमराजि सेंवल-छबि पावति। उरमुकुतामनि-माल मनोहर मनहु हंस-अवली उड़ि आवति ॥ ६ ॥ हृदय पदक, भृगु-चरन चिह्नबर, बाहु बिसाल जानुलगि पहुँचति। कल केयूर पूर कंचन-मनि, पहुँची मंजु कंजकर सोहति ॥ ७ ॥ सुजव सुरेख सुनख अंगुलिजुत सुंदर पानि मुद्रिका राजति। अंगुलित्रान-कमान-बानछबि सुरनि सुखद, असुरनि उर। सालति ॥ ८ स्याम सरीर सुचंदन-चरचित पीत दुकूल अधिक छबि छाजति। नील जलदपर निरखि चंद्रिका दुरनि त्यागि दामिनि जनु दमकति ॥ ९ ॥ यज्ञोपबीत पुनीत बिराजत गूढ़ जत्रु बनि पीन अंस तति। सुगढ़ पुष्ट उन्नत कृकाटिका, कंबु-कंठ-सोभा मन मानति ॥ १० ॥ सरद-समय-सरसीरुह-निंदक मुख सुषमा कछु कहत न बानति। निरखतही नयननि निरुपम सुख, रबिसुत-मदन-सोम- दुति निदरति ॥ ११ ॥ अरुन अधर, द्विजपांति अनूपम, ललित हँसनि जनु मन आकरषति। बिद्रुम-रचित बिमानमध्य जनु सुरमंडली सुमन-चय बरसति ॥ १२ ॥