गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४३ बालकाण्ड राम-सिसु सानुज चरित चारु गाइ-सुनि सुजनन सादर जनम-लाहु लियो है। तुलसी बिहाइ दसरथ दसचारिपुर ऐसे सुखजोग बिधि बिरच्यो न बियो है ॥ ४ ॥ माताओंने बालकोंको तेल और उबटन लगाकर स्नान कराया और फिर नेत्रोंको आंजकर अति प्रीतिपूर्वक गोरोचनका तिलक लगाया। भृकुटिपर अति अनुपम काजरकी बिन्दी लगायी। शीशपर छोटे-छोटे बाल सुशोभित हैं, जो देखनेवालेके चित्त को हर लेते हैं॥ १॥ सुमित्राको अति आनन्दपूर्वक बालकोंको गोदमें लेकर दुलार करते देख देवगण कहते हैं, इस समय सभीका पुण्य प्रकट हुआ है। ये माता, पिता, प्रिय परिजन और पुरवासीलोग धन्य हैं, जो अपने पुण्यपुञ्ज भगवान् रामको देख-देखकर प्रेमरस पान कर रहे हैं॥ २॥ इनके अति ललित और लाल-लाल नन्हें-नन्हें चरण- कमल तथा सुहावनी चालकी छबिको देखकर ही सुकविजनों का हृदय जीवित रहता है। बालचापल्ययुक्त भगवान् राम ऐसे जान पड़ते हैं, मानो शोभाकी दीवटपर रूपमय दीपक बालकेलिरूप वायुके झकोरोंसे झिलमिला रहा हो ॥ ३ ॥ सत्पुरुषोंने आदरपूर्वक अनुज- सहित बालक रामका चरित्र गा-सुनकर अपने जन्म का लाभ पाया है। तुलसीदासजी कहते हैं कि ब्रह्माने महाराज दशरथ को छोड़कर ऐसा सुखका योग चौदहों भुवनमें और कहीं नहीं रचा ॥ ४ ॥ [ ११ ] राम-सिसु गोद महामोद भरे दसरथ कौसिलाहु ललकि लषनलाल लये हैं।