गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६३ बालकाण्ड विधाताने मानो सँवारकर लक्ष्मीका निवासस्थान बनाया है, उस राजभवनमें नील कमलके समान नेत्रोंवाले, भारी भय दूर करनेवाले बालकेलिकुशल भगवान् राम भाइयों सहित विहार कर रहे हैं ॥२॥ भगवान्के अरुण चरणोंमें अंकुश, ध्वजा, कमल और वज्रके मनोहर चिह्न हैं तथा मनोहर ध्वनि करनेवाले नूपुर अत्यन्त शोभायमान हैं। (इसी प्रकार) वे कटिप्रदेशमें अति विचित्र किङ्किणीजाल, शङ्खसदृश ग्रीवामें मनोहर मालाएँ, विशाल वक्षःस्थलपर बघनहा तथा करकमलमें कङ्कण धारण किये हुए हैं ॥३॥ प्रभुकी ठोड़ी, नासिका, कपोल, ललाटपरका तिलक, भृकुटि एवं कर्ण अत्यन्त शोभायमान हैं तथा सुन्दर अधरपुटके बीच दन्तपंक्तिकी छवि भी बड़ी अनुपम है, मानो अरुण कमलके बीचमें अत्यन्त शुभ्रवर्ण कुन्दकलीकी दो- दो पंक्तियाँ हों ॥ ४ ॥ बालरूप रामकी चिकनी अलकावली मानो भ्रमरोंकी मण्डली है और उनकी किलकारी मानो भौंरोंकी विशेष गुञ्जार है। आप दर्पणमें अपने प्रतिबिम्बकी ओर टकटकी लगाकर देखते हुए प्रसन्न हो-होकर पुलकित होते हैं; अतः माताने हृदयमें रसभङ्गकी आशङ्का कर [अर्थात् यह सोचकर कि कहीं नजर न लग जाय] उन्हें गोदमें उठा लिया ॥ ५ ॥ जिसके लिये सनकादि, महादेवजी, नारदादि देवर्षि तथा शुक आदि मुनीश्वरगण काम, क्रोध और लोभको भस्म करके तरह-तरहकी योग-साधना करते हैं, उन्हीं परम उदार, प्रभुने दशरथजीके घर संसारका भार उतारनेके लिये लीलावतार धारण किया है। वे तुलसीदासका भय दूर करनेवाले हैं ॥ ६ ॥