भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 83

७७ बालकाण्ड राग बिलावल [ ३५ ] सोहत सहज सुहाये नैन । खंजन मीन कमल सकुचत तब जब उपमा चाहत कबि दैन ॥ १ ॥ सुंदर सब अंगनि सिसु-भूषन राजत जनु सोभा आये लैन । बड़ो लाभ, लालची लोभबस रहि गयो लखि सुखमा बहु मैन ॥ २ ॥ भोर भूप लिये गोद मोद भरे, निरखत बदन, सुनत कल बैन । बालक-रूप अनूप राम-छबि निवसत तुलसीदास-उर-ऐन ॥ ३ ॥ भगवान्‌के स्वभावसे ही सुन्दर नयन शोभायमान हैं। जिस समय कवि उनकी उपमा देना चाहता है, उस समय खञ्जन, मीन और कमल सकुचा जाते हैं ॥ १ ॥ भगवान्‌के सम्पूर्ण सुन्दर अङ्गों- में बालोचित आभूषण शोभायमान हैं, मानो उनसे शोभा लेनेके लिये अत्यन्त लालची कामदेव ही अनेक रूप धारण कर वहाँ आया हो और बहुत लाभ जानकर अत्यन्त शोभा देख लोभवश वहीं रह गया हो ॥ २ ॥ प्रातःकाल होते ही राजाने आनन्दमें भरकर उन्हें गोदमें उठा लिया और उनका मुख निहारने तथा मनोहर वचन सुनने लगे। बालरूप भगवान् रामकी अनुपम छवि सर्वदा तुलसीदासजीके हृदय- मन्दिरमें निवास करती है ॥ ३ ॥ राग बिभास [ ३६ ] भोर भयो जागहु, रघुनन्दन ! गत-व्यलीक भगतनि उर-चंदन ॥ १ ॥ ससि करहीन, छीन दुति तारे। तमचुर मुखर, सुनहु मेरे प्यारे ॥ २ ॥ बिकसित कंज, कुमुद बिलखाने । लै पराग रस मधुप उड़ाने ॥ ३ ॥