गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८१ बालकाण्ड माता बार-बार कहती है—हे सुजान-शिरोमणि कृपानिधान रामचन्द्र ! जागो । प्यारे ! देखो, सबेरा हो गया । आप कमलके समान विशाल नयनोंवाले तथा प्रेमरूप वापीके हंस हैं। आपके मनोहर मुखारविन्दपर करोड़ों कामदेव निछावर हैं ॥ १ ॥ देखो, बालसूर्य उदित हुआ है; रात्रि बीत चुकी है, चन्द्रमा किरणहीन हो चला है, दीपकका प्रकाश मन्द पड़ गया है और तारामण्डलकी ज्योति फीकी पड़ गयी है, मानों ज्ञानका घन प्रकाश होनेपर सम्पूर्ण भवविलास शान्त हो गये हों तथा आशा और भयरूप अन्धकारको सन्तोषरूप सूर्यके तेजने दग्ध कर दिया हो ॥ २ ॥ हे मेरे प्यारे प्राणजीवनधन पुत्र ! तुम कान लगाकर सुनो । देखो, ये जो मुखर पक्षिसमूह मधुर शब्द कर रहे हैं, सो ऐसे जान पड़ते हैं, मानो वेद, वन्दीजन, मुनिवृन्द, सूत और मागध आदि 'हे कैटभारे ! तुम्हारी जय हो, जय हो' ऐसा कहकर विरदका बखान करते हों ॥ ३ ॥ देखो, कमलवृन्द खिल गये और [ उनमें सायङ्कालको मुंदे हुए ] भ्रमरगण उन्हें छोड़कर सुमधुर ध्वनि करते हुए अलग-अलग चल दिये, जैसे वैराग्य होनेपर आपके प्रेमोन्मत्त सेवक सब प्रकारके शोकोंके कूपरूप घरको त्याग कर आपका गुणगान करते फिरते हैं ॥ ४ ॥ माताके ये अति मधुर और प्रिय वचन सुनते ही अतिशय दयालु भगवान् राम जग पड़े । इससे सारे जञ्जाल दूर हो गये तथा सब प्रकारके दुःखसमूह दलित हो गये । तुलसीदास कहते हैं, भगवान्का मुखारविन्द देखकर सभी भक्तजन अति आनन्दित हुए और उनके भ्रमजनित बन्धन छूट गये एवं राग-द्वेषादि भारी द्वन्द्व अत्यन्त मन्द हो गये ॥ ५ ॥ गी० ६—