भारतकोश
गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary

महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

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: First letter: पो Second letter: रि (it's with ि matra) Third letter: प्र Fourth letter: मि Fifth letter: ति पोरिप्रमिति! Combined with रे- at the end of line 11: रे- / पोरिप्रमिति -> रेपो रिप्रमिति! Brilliant! Nirukta 4.21: "रेपो रिप्रमिति पापनामनी भवतः"! In line 11, the end is: निरुक्तम् “रे- (Wait, let's look at रे-: yes, it has an e-matra: रे-). And line 12 starts with: पोरिप्रमिति पापनामनी भवतः” ( ४।२१ ) इति । अत्राङ्गिराः-

*   Line 13:
    `“सर्वतः पाणिपादश्च सर्वतोऽक्षिशिरोमुखः । विश्वरूपो महानग्निः प्रणीतः सर्वकर्मसु”`
*   Line 14:
    `इति । इदञ्च ध्यानपरम् । स्वरूपाख्यानस्य प्रयोजनान्तराभावादिति द्रष्टव्यम् ॥ यथाहुः`
    Wait, is there a space: `यथाहुः` or `यथाहुः-`? Just `