गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 38, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३२ ) कण्डिका विषय पृष्ठ १३—अहीन वा अहर्गण यज्ञ में परिधानीया अर्थात् समाप्ति वाली ऋचाओं का वर्णन ... ... ४८१ १४—अहीन और एकाह यज्ञों में होत्रक लोगों की दो प्रकार की परि- धानीया ऋचायें ... ... ४८४ १५—यज्ञों में अच्छावाक ऋत्विज् के विशेष स्तोत्र ... ... ४८६ प्रपाठक ६ ॥ १—अहीन यज्ञ में सम्पात सूक्तों का वर्णन ... ... ४८६ २—अहीन यज्ञ में आवाप सूक्तों का वर्णन और महत्त्व ... ४६५ ३—अहीन यज्ञ में कद्वत् प्रगाथों का उपयोग और महत्त्व ... ४६६ ४—अहीन यज्ञ में विशेष मन्त्रों का प्रयोग ... ... ५०२ ५—अहीन यज्ञ की युक्ति और विमुक्ति... ... ... ५०५ ६—होताओं और होत्रक लोगों के उक्थों का वर्णन और असुरों से यज्ञ की रक्षा ... ... ... ५०७ ७—यज्ञ में उक्थों और शिल्पों का वर्णन ... ... ५११ ८—नाभानेदिष्ठ, नाराशंस, बालखिल्य, प्रगाथ, बृहती, सतोबृहती, वृषाकपि, न्यङ्ख, एवयामरुत् और याज्या विनियोग ... ५१४ ६—नाभानेदिष्ठ, बालखिल्य, वृषाकपि और एवयामरुत् सहचरणों का वर्णन तथा बुडिल और गोश्रल के प्रश्नोत्तर ... ... ५१८ १०—षडह यज्ञ में पारुच्छेपी ऋचाओं का प्रयोग ... ... ५२१ ११—देवासुर सङ्ग्राम की आख्यायिका, यज्ञों में छठे दिन के कर्म ... ५२४ १२—षडह यज्ञ में स्तोत्रिय, अनुरूप, सुकीर्ति, वृषाकपि, कुन्ताप [ अथ० २० । १२७-१३६ ], रंभी, पारिक्षिती, कारव्या, दिशां- कॢप्ति और इन्द्र गाथाओं का वर्णन ... ... ... ५२७ १३—कुन्ताप सूक्तों में ऐतश प्रलाप, प्रवह्लिका, प्रतिराध, आजिज्ञा- सेन्या और अतिवाद मन्त्रों का प्रयोग ... ... ५३३ १४—कुन्ताप सूक्तों में आदित्य और आङ्गिरसी ऋचाओं अथवा देव- नीथ सूक्त का प्रयोग, आदित्यों का अङ्गिराओं को पृथिवी दक्षिणा, पृथिवी की विषमता और भूतेच्छन्द का प्रयोग ... ५३८ १५—कुन्ताप सूक्तों में आहनस्या ऋचाओं का प्रयोग ... ५४३ १६—कुन्ताप सूक्तों में दाधिक्री, पवमानी और ऐन्द्राबार्हस्पत्य ऋचाओं का प्रयोग, षडह यज्ञ की समाप्ति ... ... ५४६ क्षेमकरणदास त्रिवेदी ५२ लूकरगंज, प्रयाग मार्गशीर्ष शुक्ला २ सं० १६८१ वि० ता० २८ नवम्बर १६२४ ॥