भारतकोश
संग्रह पर लौटें

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi

महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished600 पृष्ठ

॥ ओ३म् ॥ प्रियं मा कृणु देवेषु प्रियं राजसु मा कृणु । प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये ॥ १ ॥ अथर्व० १९।६२।१ ॥ प्रिय मोहि करौ देव तथा राज समाज में। प्रिय सब दृष्टि वाले औ शूद्र और अर्य में ॥ Make me beloved the Gods, beloved among the princes, make. Me dear to every one who sees, To sudra and to Aryanman, Griffith's Trans, Atharva 19. 62. 1

संकेत सूची

सङ्केत    सङ्केत विषय अ० अथर्व०  अथर्ववेद, काण्ड, सूक्त, मन्त्र अष्टा०   अष्टाध्यायी अध्याय, पाद, सूत्र उ०    उणादिकोष, पाद सूत्र (स्वामी दयानन्द सरस्वती संशोधित) ऋ० ऋग्०  ऋग्वेद, मण्डल, सूक्त, मन्त्र ऐ० ब्रा०  ऐतरेय ब्राह्मण, पञ्चिका, कण्डिका गो० ब्रा० उ० गोपथ ब्राह्मण उत्तरभाग प्रपाठक कण्डिका गो० ब्रा० पू० गोपथ ब्राह्मण पूर्वभाग प्रपाठक कण्डिका ज०सं०   जर्मनसंस्करण निघ०   निघण्टु, अध्याय, खण्ड (यास्क मुनिकृत) निरु०   निरुक्त अध्याय खण्ड (यास्क मुनिकृत) पा०    पाणिनि व्याकरण-अष्टाध्यायी, अध्याय पाद सूत्र पू० सं०  पूर्व संस्करण य० यजु०  यजुर्वेद अध्याय मन्त्र वा०    वार्त्तिक श० क० द्रु० शब्दकल्पद्रुम कोष (राजा राधाकान्त देव बहादुर विरचित) सा० वे० उ० सामवेद, उत्तरार्चिक, प्रपाठक, अर्धप्रपाठक, सूक्त वा तृच सा० वे० पू० सामवेद, पूर्वार्चिक, प्रपाठक, दशति, मन्त्र ( )    इस कोष्ठ में मूल ग्रन्थ के पद हैं। [ ]    ऐसे कोष्ठ के शब्द व्याख्या वा अध्याहार हैं।

इस पृष्ठ पर केवल पिछले पृष्ठ की धुंधली/उल्टी (bleed-through/ghost impression) छपाई दिखाई दे रही है, जो पठनीय नहीं है।

<!-- पृष्ठे कोऽपि पाठः न वर्तते / This is a blank page. -->

❖ शिक्षादिवेदषडङ्गानि । पाणिनीयशिक्षा, लघधस्य ज्यौतिषं, पिंगलनागस्य छन्दः, यास्कस्य निघण्टुः, यास्कस्य निरुक्तः, आश्वलायनीयं श्रौतसूत्रम्, आश्वलायनीयं गृह्यसूत्रम् एवं पाणिनीय अष्टाध्यायी-सूत्रपाठ । सम्पादक-वासुदेवशर्मा ❖ ऋग्वेद प्रातिशाख्यम् । 'उव्वट-भाष्य' एवं हिन्दी टीका सहित । डॉ. वीरेन्द्रकुमार वर्मा ❖ V.S. Ghate's Lectures on Rigveda : Dr. V.S. Sukthankar ❖ कात्यायनश्रौतसूत्रम् । महर्षि कात्यायन प्रणीत । शुल्बसूत्रवृत्ति सहित । श्रीविद्याधरशर्मा विरचित 'सरला' वृत्ति सहित । ❖ ताण्ड्यमहाब्राह्मणम् । सायणाचार्यकृतभाष्य सहित । सम्पादक-पं. आनन्दचन्द्र- वेदान्तवागीश (1-2 भाग) ❖ निरुक्तम् । कश्यपप्रजापतिकृत 'निघण्टुभाष्य' तथा दुर्गाचार्यकृत अन्वर्थाख्या-व्याख्या- नुसारिणी 'निरुक्तविवृति' सहित । पं. मुकुन्द झा बख्शी ❖ भारद्वाजसंहिता (नारदपाञ्चरात्रम्) । हिन्दीटीका सहित । व्याख्याकार-श्री शिवप्रसाद द्विवेदी ❖ शुक्लयजुर्वेद-प्रातिशाख्यम् अथवा वाजसनेयिप्रातिशाख्यम् । उव्वटभाष्य तथा अनन्तभट्टकृत भाष्य सहित । डॉ. वीरेन्द्रकुमार वर्माकृत हिन्दी अनुवाद सहित । ❖ सामवेद-कौथुमशाखीयः । ग्रामेगेय (गेय, प्रकृति) गानात्मकः प्रथमो भाग । आरण्य गानात्मकः द्वितीयो भाग । सम्पादक-रा. नारायणस्वामिदीक्षितः ❖ तैत्तिरीय-संहिता । (कृष्णयजुर्वेदीय) । मूलमात्र ❖ ऋग्वेदसंहिता । मूलमात्र | ❖ मैत्रायणीसंहिता । मूलमात्र ❖ अथर्ववेदसंहिता । मूलमात्र | ❖ ऋक्संहितापदपाठः । ❖ सामवेदसंहिता । मूलमात्र | ❖ काठक-संहिता । (यजुर्वेदीय) । | मूलमात्र ❖ शुक्लयजुर्वेदसंहिता । मूलमात्र | ❖ काण्व-संहिता । (शुक्लयजुर्वेदीय) । | मूलमात्र चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान दिल्ली