भारतकोश
गोरक्षशतकम् (गुरु गोरखनाथ - षडङ्ग हठयोग, कुण्डलिनी एवं प्राणायाम विधान सटीक)

गोरक्षशतकम् (गुरु गोरखनाथ - षडङ्ग हठयोग, कुण्डलिनी एवं प्राणायाम विधान सटीक)

Goraksha Shatakam of Guru Gorakhnath with Commentary

गुरु गोरखनाथ (टीकाकार: पं. मोतीलाल खद्दर शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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( ७ ) ♦ उपक्रम एवं शुभाशंसनम् ♦ “गोरक्षनाथप्रणीतः गोरक्षशतकम्” नामक ग्रन्थ केवल संस्कृत में ही उपलब्ध है। इसका अक्षरशः अनुवाद तो नहीं, किन्तु प्रत्येक श्लोक का पद्यार्थ, भावार्थ हमारे डॉ. मोतीलाल खड्डर शास्त्री 'मास्टरजी' ने लिखा है जो विज्ञ सुधी पाठक जनों के लिए बड़ा ही रोचक है। मोतीलाल मास्टरजी शाक्त तन्त्र साधना जैसे तन्त्र के रहस्यात्मक ग्रन्थों के प्रणेता हैं। इस गोरक्ष शतकम् में मुख्य रूप से कुण्डलिनी प्रकरण के सभी चक्रों का वर्णन, अष्टाङ्ग योग का विशद प्रतिपादन किया है। भगवान् विश्वनाथ से मैं प्रार्थना करता हूँ कि माँ जगज्जननी भगवती पीताम्बरा जगदम्बा के पावन चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हमारे मास्टरजी द्वारा लिखित इस गोरक्ष शतकम् को पढ़कर विज्ञ सुधी पाठक जन बहुत लाभान्वित होंगे। उनकी गति, मति, रति, धर्ममय होगी।

  • आचार्य भागवतानन्द सरस्वती