भारतकोश
गोरक्षशतकम् (गुरु गोरखनाथ - षडङ्ग हठयोग, कुण्डलिनी एवं प्राणायाम विधान सटीक)

गोरक्षशतकम् (गुरु गोरखनाथ - षडङ्ग हठयोग, कुण्डलिनी एवं प्राणायाम विधान सटीक)

Goraksha Shatakam of Guru Gorakhnath with Commentary

गुरु गोरखनाथ (टीकाकार: पं. मोतीलाल खद्दर शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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( ८ ) !! श्रीमत् रामानुजाय नमः !! श्रीमद्भगवत् गीता साप्ताहिक अखण्ड पाठ एवं प्रवचन के अधिष्ठाता 卐 शुभाशीर्वाद 卐 संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति की महान धरोहर है। हमारे जितने भी मनीषी हुये है उन्होंने मानव समुदाय के कल्याण हेतु बड़ा सुन्दर तरीका बताया है। वर्तमान समय में उस (तरीके) तत्व को समझाने वाला नहीं है। सभी कुछ जानकारी के लिये संस्कृत भाषा में उद्धृत श्री गोरक्षनाथ प्रणीत गोरक्ष शतकम् के १०० श्लोकों के विचारों को लेखक डॉ. मोतीलाल खड्डुर शास्त्री (मास्टरजी) ने हिन्दी भाषा में व्यक्त किया है। महर्षि गोरक्षनाथ के विचार और लेखक ने अपने विचार जो उन्होंने हिन्दी भाषा में व्यक्त किये है, जन समुदाय के लिये उपयोगी तथा कर्मकल्याण में सहायक सिद्ध होंगे। मैं लेखक मास्टरजी को आशीर्वाद देता हूँ कि इसी प्रकार से अन्य मुनीषियों की कृतियों को आम समाज में लावें। वर्तमान समय में इसके महती की आवश्यकता है। अस्तु लेखक के दीर्घायु होने की भी मैं सहृदय कामना करता हूँ। स्वामी देवनायकाचार्य (समदर्शी) • दिनांक १९ फरवरी २०११ कम्पिल (फरूखाबांद) उ.प्र.